
सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है
दैनिक रेवांचल टाईम्स – हिंदू धर्म में किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश का आवाहन किया जाता है पंचांग के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस चतुर्थी को कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं तथा सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है
वैदिक पंचांग के अनुसार शुक्रवार 3 जुलाई सुबह 11:20 से चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी जो सुबह शनिवार 4 जुलाई दोपहर 11:20 तक रहेगी संकष्टी के दिन रात 9:53 पर संकष्टी चतुर्थी के व्रत में रात्रि के समय चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ देना अनिवार्य माना जाता है क्योंकि 3 जुलाई की रात को चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी इसलिए यह व्रत 3 जुलाई को ही रखा जाएगा सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह है 5:27 से 11:40 तक रहेगा
पंडित संदीप ज्योतिषी अमरकंटक के अनुसार कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के कृष्ण पिंगल स्वरूप की पूजा की जाती है इस स्वरूप का वर्णन भूरा और काला माना जाता है मान्यता है कि इस विशेष दिन भगवान गणेश स्वयं अपने भक्तों का सभी दुखों और विघ्नों को दूर करने के लिए पृथ्वी पर विचरण करते हैं जो भक्त इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से व्रत रखते हैं उन्हें भय भ्रम और मानसिक अशांति से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख समृद्धि का आगमन होता है
विधि विधान से करें पूजन
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें इसके बाद हाथ में जल लेकर भगवान गणेश के समक्ष व्रत का संकल्प लें दिनभर फलाहार करें या अपनी श्रद्धा एवं क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करें पूजा स्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें उन्हें लाल पुष्प अक्षत चंदन दूर्वा अर्पित करें गणेश जी को मोदक या बूंदी के लड्डू का भोग लगाये इसके बाद ओम ग गणपतये नमः मंत्र का 108 बार जाप करें कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी की व्रत का कथा अवश्य पढ़े या सुने रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल और दूध से अरघय अर्पित करें चंद्र देव की पूजा करने के पश्चात ही अपना व्रत तोड़े
इन बातों का रखें ध्यान
कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और भगवान गणेश का ध्यान करें दीपक जलाकर आरती करें और व्रत कथा का पाठ करें गणेश जी की पूजा में दूर्वा और लड्डू चढ़ावे पूजा में लाल फूल अक्षत पुष्प धूप दीप और चंदन का उपयोग करें व्रत के दौरान सात्विक भोजन का सेवन करें किसी के बारे में गलत ना सो
चे काले रंग के कपड़े भूलकर भी धारण करें व्रत का विधि विधान से पालन करें
इस दिन करें दान
कृष्ण पिंगल संकष्टी के दिन दान करने का अधिक महत्व है इस दिन पूजा करने के बाद मंदिर में अन्नं धन वस्त्र कंबल इन चीजों का दान करने से साधक को जीवन में शुभ परिणाम देखने को मिलते है
कृष्ण पिंगल संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत के लाभ
वही इस व्रत को रखने से और भगवान गणेश के इस स्वरूप की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है और जीवन से तनाव दूर हो जाता है यह व्रत संतान के सुख और समृद्धि के लिए रखा जाता है खासतौर पर अगर आपकी कोई भी मनोकामना है तो इस व्रत को रखकर आप भगवान गणेश से उसके पूरे होने का आशीर्वाद पा सकते हैं पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि किसी जातक की कुंडली में अगर बुद्ध और चंद्रमा से जुड़े दोष हैं तो उसका प्रभाव भी श्री गणेश के इस स्वरूप की पूजा करने से कम हो जाता है श्री गणेश का यह स्वरूप बहुत ही अच्छे फल देने वाला है!
