जब मकान बन रहे थे तब प्रशासन सो रहा था, अब गरीबों को उजाड़ने की तैयारी क्यों
रेवांचल टाइम्स घुघरी मंडला तहसील मुख्यालय के पीछे बसे करीब 70 गरीब परिवारों के सिर पर बेदखली की तलवार लटक गई है। अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में इन परिवारों को 19 जून तक कथित अतिक्रमण हटाने और अपने मकान स्वयं खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। नोटिस मिलते ही पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया है। बरसात की दस्तक से पहले बेघर होने की आशंका ने परिवारों की नींद उड़ा दी है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार वर्षों से रह रहे इन परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से आशियाने बनाए हैं। कई परिवारों को तो प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिला और पक्के मकान तैयार हुए। ऐसे में अचानक बेदखली की कार्रवाई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डरे-सहमे परिवार पहुंचे नीरज मरकाम के घर
बेदखली नोटिस के बाद बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बुजुर्ग एकजुट होकर भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज मरकाम के निवास पहुंचे। लोगों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई की तो उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।पीड़ितों का कहना है कि वे वर्षों से उसी स्थान पर रह रहे हैं। उनके बच्चे वहीं बड़े हुए, परिवारों ने वहीं अपना जीवन बसाया और अब अचानक उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर हटाया जा रहा है। लोगों ने भाजपा नेता से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की।
नीरज मरकाम ने उठाए प्रशासन पर तीखे सवाल
मामले को गंभीरता से लेते हुए भाजपा नेता नीरज मरकाम ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवालों की झड़ी लगा दी। उन्होंने कहा कि यदि जमीन पर अतिक्रमण था तो इतने वर्षों तक राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन क्या कर रहा था।
मरकाम ने कहा कि जब लोग मकान बना रहे थे, तब किसी अधिकारी ने उन्हें नहीं रोका। जब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्य हुए, तब भी किसी ने आपत्ति नहीं उठाई। यदि भूमि विवादित या अतिक्रमित थी तो उस समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा गरीबों को नहीं भुगतना चाहिए। जिन लोगों ने सरकारी योजनाओं के तहत घर बनाए और वर्षों से वहां निवास कर रहे हैं, उन्हें अचानक उजाड़ देना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।
मंत्री और सांसद से फोन पर की बात
मामले की गंभीरता को देखते हुए नीरज मरकाम ने तत्काल प्रदेश की पीएचई मंत्री संपतिया उईके तथा मंडला संसदीय क्षेत्र के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते से दूरभाष पर चर्चा की।
उन्होंने दोनों जनप्रतिनिधियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बेदखली कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। मरकाम ने कहा कि गरीबों के सिर से छत छीनना किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।
“अतिक्रमण हटाओ, लेकिन गरीबों को मत उजाड़ो”
नीरज मरकाम ने प्रशासन की अतिक्रमण विरोधी मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि बस स्टैंड, सार्वजनिक मार्ग और सरकारी भूमि पर किए गए नए अतिक्रमण हटाना आवश्यक है। लेकिन वर्षों से बसे गरीब परिवारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाना संवेदनहीन निर्णय होगा।उन्होंने कहा कि बरसात का मौसम सिर पर है। ऐसे समय में परिवारों को बेघर करना मानवीय दृष्टि से भी उचित नहीं है। प्रशासन को कानून के साथ-साथ सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर भी विचार करना चाहिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी उठे सवाल
मामले का सबसे बड़ा पहलू यह है कि जिन परिवारों को अब बेदखली का नोटिस दिया गया है, उनमें से कई को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है। यदि वास्तव में भूमि पर अतिक्रमण था तो ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग और संबंधित एजेंसियों ने इन परिवारों का चयन कैसे किया ।स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों और जांच प्रक्रिया के बाद ही आवास स्वीकृत हुए होंगे। ऐसे में अब उन्हीं मकानों को अवैध बताना प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
मोहल्ले में दहशत, बच्चों और बुजुर्गों की चिंता नोटिस मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है। परिवारों को चिंता सता रही है कि यदि मकान तोड़ दिए गए तो वे अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर कहां जाएंगे। कई लोगों ने घर बनाने के लिए कर्ज लिया था, जो अभी तक चुकाया जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि एक तरफ सरकार गरीबों को आवास देने की बात करती है और दूसरी तरफ वर्षों से बसे लोगों को उजाड़ने की तैयारी हो रही है। इससे लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।
एसडीएम का बयान बिना सर्वे कोई बेघर नहीं होगा
मामले में जब भाजपा नेता नीरज मरकाम ने सीधे अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) से चर्चा की, तो एसडीएम ने आश्वस्त किया कि किसी भी व्यक्ति को बिना उचित प्रक्रिया के बेघर नहीं किया जाएगा।
एसडीएम ने कहा कि पूरे क्षेत्र का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और सभी तथ्यों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य किसी गरीब परिवार को बेघर करना नहीं है, बल्कि सरकारी भूमि और राजस्व अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट करना है।
अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर
घुघरी में 70 परिवारों की बेदखली का मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह गरीबों के आवास, प्रशासनिक जवाबदेही और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
एक ओर प्रशासन सरकारी भूमि मुक्त कराने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से बसे परिवार अपने आशियाने बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन सर्वे के बाद कोई मानवीय और न्यायसंगत समाधान निकालेगा, या बरसात से पहले दर्जनों परिवारों के सिर से छत छिन जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
