राष्ट्रपति के हाथों दो स्वर्ण पदक: नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाकर सैंजली नायक ने रचा नया कीर्तिमान

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर की बेटी सैंजली नायक की उपलब्धि सिर्फ एक छात्रा की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जज़्बे का प्रमाण है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं करता।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में सैंजली नायक को एम.ए. राजनीति विज्ञान में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने पर भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu के हाथों दो स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। यह सम्मान ऐसे समय मिला जब समारोह में Mohan Yadav, Mangubhai Patel तथा कुलपति प्रो. राजेश कुमार वर्मा सहित अनेक गणमान्य हस्तियां मौजूद थीं।

सैंजली की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि यह उपलब्धि उन्हें किसी एकाग्र छात्र जीवन के दौरान नहीं मिली। हैदराबाद में आईटी ऑडिट लीड के रूप में जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। पेशेवर दबाव और शैक्षणिक अनुशासन के बीच संतुलन बनाकर विश्वविद्यालय में सर्वोच्च स्थान हासिल करना अपने आप में एक प्रेरक उदाहरण है।

सैंजली अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता श्री संजीव नायक और श्रीमती सीमा नायक को देती हैं। उनका कहना है कि परिवार के विश्वास और निरंतर सहयोग ने हर कठिन दौर में उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति दी। वे हवाबाग महाविद्यालय और विशेष रूप से डॉ. जयश्री दीक्षित के मार्गदर्शन को भी अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार मानती हैं।

आज जब शिक्षा और करियर के बीच संतुलन बनाना युवाओं के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है, तब सैंजली नायक की उपलब्धि यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास के सामने परिस्थितियां बाधा नहीं बनतीं।

राष्ट्रपति के हाथों मिला यह सम्मान न केवल सैंजली नायक के लिए अविस्मरणीय क्षण है, बल्कि उन हजारों विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और व्यस्त जीवन के बीच अपने सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी यह सफलता बताती है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जो रास्ते की कठिनाइयों से नहीं, अपने लक्ष्य से संवाद करते हैं।

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