मवई जनपद मुख्यालय की ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर ‘हाईमास्ट घोटाला’, कागजों में निविदा—जमीनी हकीकत में कमीशनखोरी!

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला।
वनांचल क्षेत्र की जनपद पंचायत मवई की मुख्यालय ग्राम पंचायत मवई में विकास कार्यों के नाम पर चौंकाने वाला भ्रष्टाचार सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों ने यह उजागर किया है कि 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से किया गया।


मामले में सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, उपयंत्री से लेकर जनपद स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि पूरे मामले को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें ठेकेदारों और चहेते दुकानदारों को लाभ पहुंचाया गया।


कागजों में निविदा, असल में फिक्सिंग!
ग्राम पंचायत मवई में चार स्थानों—बस स्टैंड बाजार गेट, बाजार रोड और बड़ तिराहा—पर हाईमास्ट लाइट लगाने के लिए करीब ₹7,22,190 की स्वीकृति दी गई। नियमों के अनुसार निविदा प्रक्रिया अपनाई जानी थी, लेकिन यहां निविदा केवल कागजों तक सीमित रही।
तीन अलग-अलग फर्मों के नाम पर जो कोटेशन लगाए गए, वे संदेहास्पद हैं—
मेसर्स जय गुरुदेव इलेक्ट्रिकल (कटंगी, बालाघाट)
मेसर्स श्री साई इंफ्रास्ट्रक्टर (लालबर्रा, बालाघाट)
जितेंद्र राणा (कटंगी, बालाघाट)


तीनों कोटेशन में तिथियां लगभग एक जैसी, रेट में मामूली अंतर—जो स्पष्ट रूप से “फिक्सिंग” की ओर इशारा करता है।
चौथे व्यापारी से खरीद—बिना कोटेशन, बिना नियम!
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिन तीन फर्मों से कोटेशन दिखाए गए, उनसे सामग्री खरीदी ही नहीं गई। इसके बजाय “श्री महाकाल ट्रेडर्स, कटंगी (बालाघाट)” नामक फर्म से सीधे खरीदारी कर ली गई—जिसका कोटेशन प्रक्रिया में कोई उल्लेख ही नहीं था।


इस फर्म के जरिए तीन अलग-अलग बिलों के माध्यम से लाखों रुपए का भुगतान किया गया:
₹2,01,173
₹1,78,301
₹2,40,497
यह पूरा लेन-देन नियमों के विरुद्ध और संदेहास्पद प्रतीत होता है।


घटिया गुणवत्ता, जनता से धोखा
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जो हाईमास्ट लाइट लगाई गई हैं, उनकी गुणवत्ता बेहद खराब है। पोल और लाइट दोनों में मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। कुछ जगहों पर लाइटें ठीक से काम भी नहीं कर रहीं।
250 किमी दूर से खरीद—क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मंडला, सिवनी, जबलपुर और बालाघाट जैसे बड़े शहर नजदीक हैं, तो फिर कटंगी (बालाघाट) जैसे तहसील स्तर के स्थान से, जो लगभग 250-270 किमी दूर है, सामग्री क्यों खरीदी गई?
क्या यह केवल कमीशनखोरी का खेल है? या फिर किसी बड़े संरक्षण में यह पूरा घोटाला किया गया?


जिम्मेदारों की चुप्पी, सवालों के घेरे में प्रशासन
वही मवई मुख्यालय होने के बावजूद जहां जनपद और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहते हैं, वहां इस प्रकार का भ्रष्टाचार होना कई सवाल खड़े करता है।
क्या यह सब उनकी जानकारी में हुआ?
या फिर उनकी मौन सहमति से?


जांच और कार्रवाई की मांग
अब जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ हो जाएगा कि प्रशासन भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में ही लगा है।


दैनिक रेवांचल टाइम्स इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहेगा, क्योंकि यह सिर्फ एक पंचायत का मामला नहीं—बल्कि पूरे सिस्टम की सच्चाई उजागर करता है।

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