ग्राम पंचायत शाहा में भ्रष्टाचार का खुला खेल! धुंधले बिलों से लाखों की बंदरबांट

Revanchal
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जनपद अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में


रेवांचल टाइम्स मंडला जिले की जनपद पंचायत नारायणगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत शाहा में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने को लूटने का खेल खुलेआम चल रहा है। सरकार गांवों के विकास के लिए ग्रामीण इलाकों में पंचायत के माध्यम से लाखों रुपये का बजट दे रही है जिसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को सड़क, पानी, बिजली, पुल-पुलिया और भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं देने के लिए लाखो रुपये पंचायतों को भेज रही है, लेकिन ग्राम पंचायत शाहा में यही पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।

पंचायत में ऐसे-ऐसे बिल लगाकर भुगतान किए गए हैं जिन्हें पढ़ना तक मुश्किल है, फिर भी लाखों रुपये की राशि निकाल ली गई। सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह खेल चल रहा है


सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार पंचायत में महिला सरपंच केवल नाम की है, जबकि पूरा सिस्टम सरपंच पति के कब्जे में है। पंचायत के वित्तीय लेनदेन से लेकर निर्माण कार्यों तक हर फैसले में सरपंच पति की भूमिका बताई जा रही है। वहीं सचिव, रोजगार सहायक, उपयंत्री और जनपद स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी राशि का बंदरबांट किए जाने के आरोप लग रहे हैं।


सबसे बड़ा खुलासा उन बिलों को लेकर हुआ है जिनके आधार पर भुगतान किया गया। राजेश ट्रेडर्स सिघनपुरी के नाम पर चबूतरा निर्माण कार्य के लिए बिल लगाया गया जिसमें बरोची में गिट्टी, रेत, सीमेंट और ईंट का विवरण दर्ज है। कुल 51 हजार 800 रुपये का भुगतान कर दिया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि बिल में न तारीख है, न सरपंच के हस्ताक्षर, न सचिव के हस्ताक्षर और न ही कोई सील। यानी बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के सरकारी पैसा निकाल लिया गया। आखिर किस नियम के तहत ऐसा भुगतान संभव हुआ।
इतना ही नहीं, पंकज राज जनरल एंड ट्रेडर्स के नाम पर लगाए गए बिलों ने तो पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। बिल क्रमांक 1639 से 1642 तक 75-75 हजार रुपये चार बार और 50 हजार रुपये एक बार निकालकर तीन लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि ये बिल इतने धुंधले हैं कि इनमें लिखी सामग्री तक साफ नजर नहीं आती। सवाल उठ रहा है कि जब बिल पढ़े ही नहीं जा सकते तो भुगतान किस आधार पर किया गया। क्या अधिकारियों ने दस्तावेज देखे बिना भुगतान कर दिया या फिर सबकुछ जानते हुए आंखें बंद कर लीं
राजेश उइके के नाम पर भी बिल क्रमांक 4 दिनांक 7 जुलाई 2025 को “दैनिक मजदूरी चुकारा” के नाम पर 25 हजार रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा ट्रेवल्स के नाम पर भी धुंधले बिल लगाकर राशि निकालने के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कई ऐसे फर्जी और संदिग्ध बिल लगाए गए हैं जिनकी यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो लाखों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है।
ग्राम पंचायत शाहा में चल रहा यह कथित भ्रष्टाचार अब केवल पंचायत तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि जनपद पंचायत नारायणगंज की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। क्योंकि बिना सत्यापन, बिना हस्ताक्षर और बिना स्पष्ट दस्तावेजों के भुगतान होना यह साबित करता है कि या तो अधिकारी पूरी तरह लापरवाह हैं या फिर इस खेल में उनकी भी हिस्सेदारी है। आखिर जनपद में बैठे जिम्मेदार अधिकारी क्या इन धुंधले बिलों को नहीं देख पाए या फिर कमीशन के खेल में सबकी आंखें बंद हो गईं
सूत्रों ने बताया कि पंचायत में विकास कार्य केवल कागजों में पूरे दिखाए जा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई जगह काम अधूरा है, तो कहीं सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब बताई जा रही है। इसके बावजूद भुगतान धड़ल्ले से जारी है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत के सभी बिल, वाउचर, मस्टर रोल और निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, उपयंत्री और जनपद अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह भ्रष्टाचार अन्य पंचायतों के लिए भी उदाहरण बन जाएगा।
सरकार चाहे जितनी योजनाएं बना ले, लेकिन जब जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार इस कदर हावी हो जाए कि धुंधले और बिना हस्ताक्षर वाले बिलों पर लाखों रुपये निकल जाएं, तब विकास केवल कागजों तक सीमित रह जाता है। ग्राम पंचायत शाहा का मामला अब यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या पंचायतों में जनता के पैसे की कोई निगरानी बची भी है या नहीं अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में जांच बैठाकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। लेकिन एक बात तय है—यदि आरोप सही साबित हुए तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की खुली लूट मानी जाएगी।

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