हितकारिणी कॉलेज की छात्राएं बोलीं – बस आते ही थम जाता है यातायात, प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ दिखावा
जबलपुर। शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों में शामिल करमचंद चौक से घंटाघर मार्ग इन दिनों अव्यवस्थित यातायात और बढ़ते अतिक्रमण के कारण आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन चुका है। विशेष रूप से हितकारिणी कॉलेज के आसपास की स्थिति गंभीर होती जा रही है, जहां सड़क किनारे और बीच मार्ग तक फैली सीट कवर एवं अन्य अस्थायी दुकानों ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। कॉलेज छात्राओं ने इस अव्यवस्था को लेकर नगर निगम और यातायात प्रशासन पर सवाल उठाए हैं तथा तत्काल विशेष अभियान चलाने की मांग की है।
कॉलेज की छात्राओं ने बताया कि दोपहर के समय, विशेषकर 1 बजे के बाद जब कॉलेज बसें पहुंचती हैं, तब सड़क पर हालात बेहद खराब हो जाते हैं। सड़क पर अवैध रूप से फैली दुकानों और अतिक्रमण के कारण बसों को रुकने में कठिनाई होती है, जिससे पूरा मार्ग जाम की चपेट में आ जाता है। छात्राओं का कहना है कि इस दौरान उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है और कई बार ट्रैफिक में फंसने के कारण लंबा इंतजार करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार करमचंद चौक से घंटाघर तक प्रतिदिन लंबा जाम लगना अब आम बात हो गई है। सड़क किनारे छोटे-छोटे ठेले और अस्थायी दुकानें तो परेशानी बढ़ा ही रही हैं, वहीं कई बड़े शोरूम भी अपने प्रतिष्ठानों के बाहर तक सामान फैलाकर अतिक्रमण किए हुए हैं। इससे सड़क की चौड़ाई लगातार कम होती जा रही है और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वाहन चालकों का कहना है कि कई बार उन्हें 15 से 20 मिनट तक सड़क पर रुकना पड़ता है, क्योंकि ट्रैफिक पूरी तरह बाधित हो जाता है। क्षेत्र में न तो पार्किंग की उचित व्यवस्था दिखाई देती है और न ही यातायात नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम। स्थिति यह है कि पैदल चलने वालों तक को सड़क पर सुरक्षित रास्ता नहीं मिल पा रहा।
स्थानीय नागरिकों और छात्राओं ने आरोप लगाया कि यातायात थाना समय-समय पर केवल औपचारिक कार्रवाई करता है। कभी-कभार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दिखाई जरूर देती है, लेकिन अगले ही दिन फिर वही दुकानें और वही अव्यवस्था दोबारा सड़क पर नजर आने लगती है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई स्थायी समाधान के बजाय केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है।
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि करमचंद चौक और आसपास के इलाकों में नियमित और कठोर अभियान चलाया जाए। सड़क पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए स्थायी योजना तैयार की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
शहर में स्मार्ट ट्रैफिक और व्यवस्थित बाजारों के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन करमचंद चौक की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब ठोस कदम उठाता है और आम जनता को रोजाना के जाम और अव्यवस्था से राहत मिल पाती है या नहीं।
