सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री की चौकड़ी पर गंभीर आरोप
धुंधले और संदिग्ध बिलों के सहारे सरकारी राशि के बंदरबांट का खेल?
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले के बीजाडांडी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मैली एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है और सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक तथा उपयंत्री की कथित मिलीभगत से फर्जी बिलों के जरिए लाखों रुपये के भुगतान किए जा रहे हैं।



सरकार द्वारा पंचायत व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल, डिजिटल भुगतान और दस्तावेजों की सार्वजनिक निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई थीं ताकि जनता घर बैठे पंचायतों के कामकाज, बिल-वाउचर और विकास कार्यों की जानकारी देख सके। लेकिन ग्राम पंचायत मैली में इन व्यवस्थाओं को ही भ्रष्टाचार का नया जरिया बना देने के आरोप लग रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत पोर्टल पर अपलोड किए गए कई बिल इतने धुंधले और संदिग्ध हैं कि उनमें न तो राशि साफ दिखाई दे रही है और न ही सामग्री खरीदी का स्पष्ट विवरण समझ आ रहा है।
कई बिलों में दुकानों के नाम अस्पष्ट बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ में तारीख, मात्रा और भुगतान संबंधी जानकारी तक पढ़ना मुश्किल है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसे दस्तावेजों के आधार पर भुगतान किस नियम के तहत किया गया?
आरोप यह भी हैं कि बिना जीएसटी पंजीयन वाली फर्मों और संदिग्ध दुकानों के नाम पर बिल लगाकर पंचायत की राशि निकालने का खेल लंबे समय से जारी है। यदि खरीदी और निर्माण कार्य वास्तविक हैं तो फिर दस्तावेजों को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करने में आखिर डर किस बात का है?
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्य केवल कागजों में दिखाई दे रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। कई निर्माण कार्य अधूरे बताए जा रहे हैं और कुछ स्थानों पर कार्य की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। इसके बावजूद भुगतान प्रक्रिया तेजी से पूरी कर ली गई, जिससे पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह खड़ा हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल जनपद पंचायत और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहा है। पंचायत खातों का परीक्षण करने वाले अधिकारी आखिर अब तक मौन क्यों हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को ये धुंधले और संदिग्ध बिल दिखाई नहीं दिए, या फिर पूरे मामले में मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता?
ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत मैली में हुए सभी भुगतान, बिल-वाउचर, निर्माण कार्यों और सामग्री खरीदी की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही सामाजिक अंकेक्षण कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पंचायतों में सरकारी धन की खुली लूट पर रोक लगाना मुश्किल हो जाएगा।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हैं या फिर अन्य मामलों की तरह यह शिकायत भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।
