आखिर किसके संरक्षण में चल रहा अवैध खेल
रेवांचल टाइम्स, मंडला।एक ओर शासन मंडला को “पवित्र नगरी” का दर्जा देकर शराब दुकानों को बंद करने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के भीतर खुलेआम शराब का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। हालत यह है कि मंडला शहर में अंग्रेजी शराब से लेकर कच्ची हाथ भट्टी की शराब तक हर गली-मोहल्ले में आसानी से उपलब्ध हो रही है। अवैध शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं की होम डिलीवरी तक की सुविधा दी जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह सब किसके संरक्षण में चल रहा है क्या पुलिस और आबकारी विभाग को इसकी भनक तक नहीं, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है
जानकारी के अनुसार शहर की छह शराब दुकानों को बंद कर मंडला को पवित्र नगरी घोषित किया गया था। उद्देश्य था कि शहर में शराब बिक्री पर रोक लगे और सामाजिक वातावरण बेहतर बने। लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट दिखाई दे रही है। वर्तमान में शहर के भीतर लगभग 100 से अधिक स्थानों पर अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। इनमें घर, ढाबे, होटल, गुमटियां और छोटी-छोटी दुकानें शामिल हैं, जहां खुलेआम शराब का कारोबार जारी है।
सूत्रों के मुताबिक देवदरा, रमपुरा, गोंझी, कटरा, राजीव कॉलोनी, बिंझिया, लालीपुर, बस स्टैंड, मछली मार्केट, छोटी खैरी, बड़ी खैरी, सब्जी मंडी और डिंडौरी नाका कारिकोंन महाराजपुर जैसे क्षेत्रों में खुलेआम शराब बेची जा रही है। शाम ढलते ही इन इलाकों में शराब तस्करों और कारोबारियों की सक्रियता बढ़ जाती है। कई जगहों पर तो होटल और ढाबों में बाकायदा बैठाकर शराब पिलाई जा रही है। इसके बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में भी शराब का अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है। जहां रोज हजारों लोगों की आवाजाही होती है, वहां शराब की बिक्री होना इस बात का संकेत है कि अवैध कारोबारियों को किसी न किसी स्तर पर संरक्षण जरूर प्राप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर अवैध शराब कारोबार संभव ही नहीं है।शहरवासियों का आरोप है कि शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है। छोटे-मोटे मामलों में कार्रवाई दिखाकर विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, लेकिन बड़े अवैध नेटवर्क पर कोई हाथ डालने की हिम्मत नहीं करता। यही कारण है कि शराब का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है और शहर की सामाजिक व्यवस्था को खोखला कर रहा है।लोगों में यह चर्चा आम हो चुकी है कि बिना लेनदेन के यह अवैध कारोबार नहीं चल सकता। शराब माफियाओं और जिम्मेदार विभागों के बीच कथित सांठगांठ की बातें अब खुलेआम होने लगी हैं। यदि समय-समय पर कार्रवाई होती भी है, तो वह केवल खानापूर्ति बनकर रह जाती है। कुछ दिनों की सख्ती के बाद फिर वही कारोबार शुरू हो जाता है।
अवैध शराब के कारण शहर में अपराधों का ग्राफ भी लगातार बढ़ रहा है। नशे में धुत लोग आए दिन सड़क पर हंगामा करते नजर आते हैं। कई क्षेत्रों में महिलाओं और परिवारों का रहना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब के कारण घरेलू हिंसा, चोरी, मारपीट और सड़क हादसों की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।
कच्ची हाथ भट्टी की शराब को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अवैध तरीके से तैयार की जा रही यह जहरीली शराब कभी भी बड़ी घटना को जन्म दे सकती है। इसके बावजूद आबकारी विभाग की निष्क्रियता समझ से परे है। आखिर जब शहर के हर इलाके में शराब आसानी से उपलब्ध है, तो फिर विभाग की कार्रवाई केवल दिखावे तक ही क्यों सीमित है
शहरवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो 24 घंटे के भीतर इस अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सकती है, लेकिन सवाल इच्छाशक्ति का है। जब जिम्मेदार विभाग ही कार्रवाई के बजाय मौन साध ले, तो अवैध कारोबारियों के हौसले बढ़ना तय है।
अब लोगों ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि शहर में चल रहे अवैध शराब कारोबार की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिन क्षेत्रों में खुलेआम शराब बेची जा रही है, वहां लगातार छापामार कार्रवाई हो और शराब माफियाओं के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।
मंडला को पवित्र नगरी घोषित करना केवल बोर्ड और सरकारी घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि शहर में खुलेआम शराब बिकती रही, तो यह “पवित्र नगरी” का तमगा केवल मजाक बनकर रह जाएगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर अवैध शराब का यह काला कारोबार यूं ही फलता फूलता रहेगा।
