ग्राम पंचायत पड़रिया में भ्रष्टाचार का सी सी रोड़ मॉडल

Revanchal
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ठेकेदारी प्रथा सामग्री से ज़्यादा भुगतान बिना सील हस्ताक्षर लाखो की निकासी

रेवांचल टाइम्स, नारायणगंज मंडला
केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण विकास को गति देने के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत सड़क, नाली, जल संरक्षण, पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्र और अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के लिए हर वर्ष भारी बजट जारी किया जाता है, ताकि गांवों का समग्र विकास हो सके और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं में भ्रष्टाचार और बंदरबांट के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला जनपद पंचायत नारायणगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़रिया से सामने आया है, जहां सीसी सड़क निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।


सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत पड़रिया में ग्राम सभा द्वारा दिनांक 25 जनवरी 2025 को सीसी सड़क निर्माण कार्य का अनुमोदन किया गया था। निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत को बनाया गया और यह कार्य पांचवें वित्त आयोग महिला बाल विकास से लोक सेवा तक सड़क निर्माण योजना के अंतर्गत स्वीकृत किया गया। इस निर्माण कार्य की कुल लागत 4 लाख 62 हजार रुपए निर्धारित की गई थी, जिसमें मजदूरी मद में 46 हजार 200 रुपए और सामग्री मद में 4 लाख 15 हजार 800 रुपए खर्च होना दर्शाया गया।


लेकिन दस्तावेजों और भुगतान विवरण में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। सूत्रों से जानकारी के अनुसार बिल क्रमांक 1686 दिनांक 20 मई 2025 में सेंटिंग भाड़ा के नाम पर 7 हजार रुपए का भुगतान किया गया। इसके बाद बिल क्रमांक 1661 दिनांक 5 अप्रैल 2025 में मिक्सर मशीन, सेंटिंग भाड़ा, वाइब्रेटर और पानी टैंकर के नाम पर 91 हजार 500 रुपए का भुगतान किया गया। वहीं बिल क्रमांक 1660 दिनांक 5 अप्रैल 2025 में 280 बैग सीमेंट 380 रुपए प्रति बैग की दर से 1 लाख 6 हजार 400 रुपए का भुगतान दर्शाया गया।

इसके अलावा बिल क्रमांक 1659 दिनांक 5 अप्रैल 2025 में गिट्टी और रेत के नाम पर 2 लाख 52 हजार रुपए का भुगतान किया गया।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन सभी भुगतान का लाभ एक ही फर्म “सोनी ट्रेडर्स” को दिया गया। सूत्रों के अनुसार उक्त ट्रेडर्स को कुल 4 लाख 56 हजार 900 रुपए का भुगतान कर दिया गया, जबकि सामग्री मद की स्वीकृत राशि मात्र 4 लाख 15 हजार 800 रुपए थी। यानी निर्धारित लागत से अधिक भुगतान किए जाने का मामला सामने आ रहा है। इससे साफ तौर पर वित्तीय अनियमितता और मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।


आरोप है कि निर्माण कार्य में मजदूरों से अपेक्षित कार्य नहीं कराया गया और अधिकांश काम मशीनों से कराया गया। जबकि पंचायत रिकॉर्ड में मजदूरी मद में राशि खर्च दर्शाई नही गई है। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर मजदूरी के नाम पर भुगतान किस आधार पर किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में ठेकेदारी प्रथा पूरी तरह हावी हो चुकी है, जबकि नियमानुसार ग्राम पंचायत निर्माण कार्य सीधे मजदूरों के माध्यम से कराने के लिए बाध्य होती है।


मामले में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है कि जिन बिलों के आधार पर लाखों रुपए का भुगतान किया गया, उन पर न तो सरपंच और न ही सचिव के विधिवत हस्ताक्षर और सील मौजूद नही हैं। इसके बावजूद भुगतान प्रक्रिया पूरी कर दी गई। इससे पंचायत की वित्तीय प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।


सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार संबंधित उपयंत्री द्वारा निर्माण कार्य का स्थल निरीक्षण किए बिना ही घर बैठे मूल्यांकन कर दिया गया। यदि तकनीकी अधिकारी मौके पर पहुंचकर गुणवत्ता की जांच करते तो निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति सामने आ जाती। लेकिन कथित कमीशन और मिलीभगत के चलते कागजों में सब कुछ सही दर्शाकर भुगतान जारी कर दिया गया।


ग्रामीणों के अनुसार निर्माण के कुछ ही समय बाद सीसी सड़क उखड़ने लगी है और जगह-जगह से उखड़ी दिखाई देने लगी हैं। सड़क की गुणवत्ता देखकर ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और सिर्फ सरकारी राशि निकालने के उद्देश्य से निर्माण कार्य को जल्दबाजी में पूरा किया गया।


ग्राम पंचायत स्तर पर लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतें करने के बावजूद जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है और दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। यही कारण है कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।


क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और संबंधित विभागों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि तकनीकी एवं वित्तीय जांच निष्पक्ष रूप से कराई जाए तो लाखो रुपए के विकास कार्यों में हो रही अनियमितताओं की परतें खुल सकती हैं। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए शासकीय राशि की रिकवरी की मांग भी उठाई है।


अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्राम पंचायत पड़रिया में हुए कथित भ्रष्टाचार पर जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करेंगे, या फिर हर बार की तरह जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। फिलहाल ग्राम पंचायत पड़रिया में सीसी सड़क निर्माण को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं सड़क कम बनी लेकिन भ्रष्टाचार की परतें ज्यादा मोटी बिछ गई।

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