कान्हा में “टाइगर मौतों” का काला सच! 2 माह के अंदर आठ बाघो की मौत पर उठे सवाल

Revanchal
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आखिर किसकी लापरवाही से खत्म हो रही जंगल की शान?

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला।विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। दो माह के अंदर लगभग आठ बाघों की मौत से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। लगातार हो रही बाघों की मौतों ने न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है, बल्कि “टाइगर संरक्षण” के सरकारी दावों की भी पोल खोलकर रख दी है। जंगल का राजा अब खुद जंगल में सुरक्षित नहीं दिखाई दे रहा। आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? यह सवाल अब आम जनता से लेकर वन्यजीव प्रेमियों और पत्रकारों तक हर किसी की जुबान पर है।


कान्हा, जिसे देश-विदेश में बाघ संरक्षण के मॉडल के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है, वहीं अब बाघों की रहस्यमयी मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। कभी बीमारी, कभी आपसी संघर्ष, तो कभी संदिग्ध परिस्थितियों में बाघों की मौत की खबरें सामने आती हैं, लेकिन हर बार जांच सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह जाती है। न किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होती है और न ही किसी बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आती है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपए का बजट, हाईटेक मॉनिटरिंग सिस्टम, वन्यजीव सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे और भारी-भरकम अमला आखिर किस काम का, जब देश की सबसे महत्वपूर्ण वन्य प्रजाति ही सुरक्षित नहीं? क्या जंगल में शिकारियों का नेटवर्क सक्रिय है? क्या वन विभाग की निगरानी कमजोर पड़ चुकी है? या फिर अंदरखाने ऐसी लापरवाहियां छिपी हैं जिन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है?


पिछले दिनों पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई थी। आंदोलन हुए, ज्ञापन सौंपे गए, निष्पक्ष जांच की मांग की गई, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सच्चाई सामने नहीं लाई गई, तो कान्हा का गौरव और बाघ संरक्षण की पहचान दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।


वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही मौतें केवल प्राकृतिक घटना मानकर नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं। जरूरत इस बात की है कि प्रत्येक मौत की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच हो, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई हो। केवल प्रेस विज्ञप्तियों और औपचारिक जांच से अब जनता संतुष्ट होने वाली नहीं है।


आज सबसे बड़ा सवाल यही है
क्या कान्हा में बाघ वास्तव में सुरक्षित हैं?
यदि नहीं, तो फिर “टाइगर रिजर्व” की चमकदार तस्वीरों के पीछे छिपा सच आखिर कब सामने आएगा?

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