दीया तले अंधेरा, क्या ट्रांसफर नीति ला पाएगी उजाला?

Revanchal
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तहसील और एसडीएम कार्यालयों में जमे अंगद के पैर, अब वट वृक्ष बन गए।

दैनिक रेवांचल टाइम्स सिवनी- प्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति हर वर्ष प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और कार्यकुशलता लाने का दावा करती है, लेकिन सिवनी जिले के तहसील और एसडीएम कार्यालयों में कुछ कर्मचारियों की वर्षों पुरानी पदस्थापना इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। चर्चा है कि कई कर्मचारी इतने लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं कि अब वे प्रशासनिक व्यवस्था में वट वृक्ष की तरह अपनी जड़ें जमा चुके हैं।

वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारी

क्रमांक| नाम| पद/पदस्थापना| अनुमानित अवधि
1| संकेत गड़ेवाल । एसडीएम रीडर| लगभग 6 वर्ष
2| मनीष सोनी| एसडीएम रीडर| लगभग 15 वर्ष
3| ग्रीष्मा बिसेन| रीडर/तहसीलदार, सिवनी| लगभग 8 वर्ष
4| ऋतिक रहांगडाले| रीडर/तहसीलदार, भोमा| लगभग 5 वर्ष
5| दिनेश उइके| रीडर/तहसीलदार| लगभग 5 वर्ष
6| हिम्मत सिंह सनोड़िया| आरआई, नजूल सिवनी| लगभग 10 वर्ष
7| अनिल मिश्रा| आरआई, सिवनी भाग-1| लगभग 8 वर्ष
8| धीरेन्द्र गुमस्ता| आरआई, बंडोल| लगभग 6 वर्ष
9| राहुल मुड़िया| आरआई, भोमा| लगभग 10 वर्ष
10| सोमेन्द्र बिसेन| आरआई, लैंड रिकॉर्ड| लगभग 10 वर्ष

स्थानांतरण नीति पर उठ रहे सवाल

जानकारी के अनुसार सूची में शामिल कई कर्मचारी वर्षों से एक ही कार्यालय अथवा क्षेत्र में पदस्थ हैं। जबकि शासन की मंशा समय-समय पर स्थानांतरण के माध्यम से प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने की रहती है। ऐसे में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापना को लेकर लोगों के बीच सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।

अधिकारी बदले, लेकिन नहीं बदली कुर्सियां

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि वर्षों के दौरान कई एसडीएम, तहसीलदार और अन्य अधिकारी आए और चले गए, लेकिन कुछ कर्मचारियों की पदस्थापना यथावत बनी रही। यही कारण है कि अब इन्हें “अंगद के पैर” से आगे बढ़कर “वट वृक्ष” की संज्ञा दी जाने लगी है, जिनकी जड़ें व्यवस्था में काफी गहरी मानी जा रही हैं।

कार्यप्रणाली को लेकर भी होती रही चर्चा

स्थानीय स्तर पर समय-समय पर इन कर्मचारियों की कार्यशैली, प्रभाव और कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। लोगों का कहना है कि जिस स्थान से शासन की योजनाओं और राजस्व प्रशासन का संचालन होता है, वहां स्थानांतरण नीति का प्रभाव दिखाई न देना अपने आप में विचारणीय विषय है।

जनता के मन में उठ रहा बड़ा सवाल

आम लोगों के बीच यह प्रश्न भी चर्चा का विषय है कि जब अन्य कर्मचारियों का निर्धारित समयावधि पूरी होने पर स्थानांतरण किया जाता है तो वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों के मामले में अलग स्थिति क्यों दिखाई देती है? क्या नियम सबके लिए समान हैं या फिर कुछ मामलों में अपवाद बन जाते हैं?

अब निगाहें प्रशासनिक निर्णय पर

हालांकि सूची में उल्लेखित अवधि अनुमानित है और इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा ही की जा सकती है, लेकिन यदि स्थिति इससे मिलती-जुलती है तो यह स्थानांतरण नीति के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। अब देखना यह होगा कि शासन और जिला प्रशासन इन मामलों की समीक्षा करता है या फिर वर्षों से जमे इन वट वृक्षों की जड़ें और मजबूत होती जाएंगी।

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