एनएच-543 बना किसानों के लिए अभिशाप काका कंस्ट्रक्शन पर जमीन बर्बाद करने के आरोप

Revanchal
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दो साल से खेतों में नहीं उगी फसल, शिकायतों पर प्रशासन मौन

रेवांचल टाइम्स मोहगांव/मंडला विकास के नाम पर बनाई जा रही एनएच-543 सड़क परियोजना अब किसानों के लिए मुसीबत का सबब बनती जा रही है। मंडला से डिंडोरी सड़क निर्माण का कार्य कर रही हिलविज काका कंस्ट्रक्शन कंपनी पर किसानों की कृषि भूमि को मलबा घर बनाने, अवैध उत्खनन करने और विरोध करने पर धमकाने जैसे आरोप लगे हैं। मामला जनपद पंचायत मोहगांव की ग्राम पंचायत चाबी के ग्राम अण्डियामाल का है, जहां दर्जनों किसान अपनी बर्बाद हुई जमीन और उजड़ती खेती को लेकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।


विकास की सड़क या किसानों की बर्बादी का रास्ता
जहां एक ओर जिले के किसान सीजन की फसल की तैयारियों में जुटे हुए हैं, वहीं अण्डियामाल के कई किसान ऐसे हैं जिनकी जमीन पिछले दो से तीन वर्षों से खेती लायक नहीं बची है। आरोप है कि सड़क निर्माण से निकला हजारों टन मलबा, गिट्टी और पत्थर किसानों के खेतों में बिना अनुमति डाल दिए गए। इससे खेतों की उपजाऊ मिट्टी नष्ट हो गई और भूमि पूरी तरह बंजर जैसी स्थिति में पहुंच गई।


ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी ने खेत सुधार और समतलीकरण के नाम पर किसानों से समझौते किए, लेकिन खेत सुधारने की बजाय उनकी जमीनों को गहरे गड्ढों और पत्थरों के ढेर में बदल दिया गया।


दिन में विकास, रात में मलबा डंपिंग
किसानों का आरोप है कि कंपनी ने कई स्थानों पर रात के अंधेरे में ट्रकों से मलबा लाकर खेतों में डलवाया। जिन किसानों ने विरोध किया, उन्हें धमकाया गया। ग्राम चाबी के किसान राजेश यादव ने बताया कि उनकी कृषि भूमि खसरा नंबर 111/5 में बिना अनुमति करीब 150 से 200 ट्रक मलबा डाल दिया गया, जिसके कारण वे पिछले दो वर्षों से खेती नहीं कर पा रहे हैं।
राजेश यादव का आरोप है कि विरोध करने पर कंपनी के जिम्मेदार लोगों द्वारा मारपीट और जान से मारने तक की धमकियां दी गईं। सवाल यह है कि यदि किसानों के आरोप झूठे हैं तो उनकी जमीनें आज भी मलबे से क्यों पटी हुई हैं


एग्रीमेंट का खेल, उत्खनन कहीं और!
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने जिन स्थानों के लिए एग्रीमेंट किया, उत्खनन कहीं और किया गया। सूत्र से जानकारी अनुसार कि शासकीय भूमि पर भी भारी पैमाने पर खुदाई की गई है। कुछ स्थानों पर करीब 50 फीट तक गहरे गड्ढे बना दिए गए हैं। यदि यह सच है तो यह केवल किसानों के अधिकारों का हनन नहीं बल्कि राजस्व नियमों और खनिज नियमों की खुली अवहेलना भी है।


दो साल से शिकायत, कार्रवाई शून्य
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामीणों ने इस मामले की लिखित शिकायत 30 अगस्त 2024 को मोहगांव तहसील में की थी। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिर 12 मई 2026 को तहसील मोहगांव और जनसुनवाई मंडला में आवेदन देकर न्याय की मांग की गई, लेकिन न जांच हुई, न दोषियों पर कार्रवाई।
ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार सिर्फ आश्वासन दिया जाता है और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
किसानों का सवाल – आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल
जब किसानों की जमीन बर्बाद हो रही थी, तब जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे यदि शिकायतें वर्षों से लंबित हैं तो जांच क्यों नहीं हुई यदि खेतों में मलबा डाला गया है तो उसे हटाने के आदेश क्यों नहीं दिए गए
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि आखिर ऐसी कौन सी ताकत है जिसके कारण शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। क्या बड़ी कंपनी होने के कारण प्रशासन कार्रवाई से बच रहा है या फिर कहीं न कहीं पूरा तंत्र किसानों की पीड़ा पर आंखें मूंदे बैठा है
कंपनी चली जाएगी, किसान जिंदगी भर भुगतेंगे नुकसान
किसानों का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और कुछ समय बाद कंपनी क्षेत्र छोड़ देगी। लेकिन जिन किसानों की जमीनें बर्बाद हुई हैं, उनका नुकसान कौन भरेगा। खेतों में पड़े पत्थर, गिट्टी और मलबे के बीच किसान आखिर कैसे खेती करेंगे
प्रभावित किसानों ने मांग की है कि तत्काल मलबा हटाया जाए, खेतों का समतलीकरण कराया जाए, अवैध उत्खनन की निष्पक्ष जांच हो और नुकसान झेल रहे किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
न्याय मिलेगा या फाइलों में दफन हो जाएगा मामला
बारिश सिर पर है। किसान बोनी की तैयारी कर चुके हैं, लेकिन अण्डियामाल के कई किसानों के लिए यह मौसम फिर चिंता लेकर आया है। यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा तो एक और फसल सीजन बर्बाद हो जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसानों की पुकार सुनेगा या एनएच-543 के नाम पर किसानों की जमीनों को बर्बाद करने वालों को खुली छूट मिलती रहेगी।
कहीं ऐसा न हो कि विकास की चमचमाती सड़क के नीचे किसानों के अधिकार, उनकी मेहनत और उनकी आजीविका हमेशा के लिए दफन हो जाए।

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