बजाग। आदर्श ग्राम पंचायत कहे जाने वाले वनग्राम चांडा क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के दावों की हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। शहडोल–पंडरिया राज्य मार्ग पर चांडा तिराहे के समीप सामान्य वन क्षेत्र में सड़क किनारे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की पानी की बोतलें, शराब के पाव की प्लास्टिक शीशियां, डिस्पोजल गिलास, पॉलीथीन और अन्य कचरा बिखरा पड़ा है। इसके अलावा भी हाइवे सड़क के दोनो किनारों पर वन मार्ग में जगह जगह प्लास्टिक के बनी वस्तुएं फैली हुई है जंगल के बीच पसरी यह गंदगी न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन रही है, बल्कि वन्यजीवों के जीवन पर भी संकट खड़ा कर रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालक और राहगीर यहां वाहन रोककर भोजन और शराब का सेवन करते हैं तथा उपयोग के बाद प्लास्टिक और डिस्पोजल जंगल में ही फेंककर चले जाते हैं। लगातार बढ़ रहे इस कचरे के कारण पूरा क्षेत्र प्रदूषित होता जा रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
यह क्षेत्र साल वृक्षों से समृद्ध संरक्षित वन क्षेत्र से लगा हुआ है है, जहां आसपास विभिन्न प्रकार के शाकाहारी वन्यजीव निवास करते हैं। खाद्य पदार्थों के पैकेट और प्लास्टिक में बचे अवशेषों की ओर आकर्षित होकर जानवर इन्हें खा लेते हैं। प्लास्टिक उनके पेट में पहुंचने होने वाली बीमारी, से मृत्यु तक का खतरा बना रहता है। पर्यावरण विशेषज्ञ भी लंबे समय से जंगलों में प्लास्टिक कचरे को वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बताते रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो जंगल की स्वच्छता और जैव विविधता दोनों प्रभावित होंगी। लोगों ने वन विभाग और प्रशासन से नियमित निगरानी, सफाई अभियान तथा कचरा फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
क्या कहता है वन विभाग का नियम
भारतीय वन अधिनियम, तथा वन संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत आरक्षित वन क्षेत्र में गंदगी फैलाना, प्रदूषण करना और वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाना प्रतिबंधित है। इसके अलावा प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, के अनुसार सार्वजनिक स्थानों और प्राकृतिक क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा फेंकना दंडनीय कृत्य है। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग द्वारा जुर्माना लगाया जा सकता है तथा स्थानीय प्रशासन और वन विभाग कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं। यदि वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने या नियमों का उल्लंघन करने का मामला बनता है, तो वन अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
अब सवाल यह है कि जब सामान्य वन में खुलेआम प्लास्टिक और शराब की बोतलें फेंकी जा रही हैं, तब जिम्मेदार विभाग की निगरानी आखिर कहां है? यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आदर्श ग्राम पंचायत का यह वन क्षेत्र धीरे-धीरे प्लास्टिक के कचरे का अड्डा बनता जाएगा।
