गुरु भक्ति के रंग में रंगा छिंदवाड़ा, हजारों श्रद्धालुओं ने मनाया गुरुपूर्णिमा का अमृत पर्व

Revanchal
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रुद्राभिषेक, गुरु पादुका पूजन, भजन-कीर्तन और विशाल भंडारे के साथ संपन्न हुआ गुरुपूर्णिमा महोत्सव

गुरु ही जीवन के पथप्रदर्शक
गु से अंधकार मिट जावे रु शब्दे प्रकाश फैलावे :- स्वामी सदानंद तीर्थ

रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा

भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। इसी गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को स्वामी शिवोम् तीर्थ कुंडलिनी महायोग आश्रम, दुर्गा मंदिर ट्रस्ट, साउथ सिविल लाइन, गुरैया रोड, छिंदवाड़ा में श्री गुरुपूर्णिमा महोत्सव (अमृत पर्व) अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। पूरे दिन चले विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में गुरु भक्तों, साधकों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर गुरु चरणों में अपनी आस्था अर्पित की।

आश्रम के स्वामी सदानंद तीर्थ ने बताया कि गुरुपूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं तथा साधक को आत्मबोध एवं ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण और अनुसरण प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।

महोत्सव का शुभारंभ प्रातः 4 बजे से 6 बजे तक सामूहिक साधना के साथ हुआ, जिसमें साधकों ने ध्यान कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। इसके पश्चात प्रातः 7 बजे से 8 बजे तक श्री गुरु गीता का सामूहिक पाठ किया गया। गुरु स्तुति से पूरा आश्रम भक्तिमय वातावरण में डूब गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई।

प्रातः 9:30 बजे से श्री रुद्राभिषेक एवं गुरु पादुका पूजन संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गुरु चरणों का पूजन, अभिषेक और आराधना की गई। पूजन के पश्चात भव्य आरती, भजन एवं संकीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए। आश्रम परिसर में “जय गुरुदेव” के जयघोष और भक्ति संगीत की स्वर लहरियां देर तक गूंजती रहीं।

दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज़ से पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सेवा कार्य में आश्रम के स्वयंसेवकों एवं गुरु भक्तों ने पूरे समर्पण भाव से अपनी सेवाएं दीं। इसके पश्चात सायंकाल चाय प्रसाद के बाद पुनः सामूहिक साधना आयोजित की गई।

शाम के समय माताजी की आरती, गुरु महाराज की आरती, भजन-कीर्तन एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। दिनभर चले कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति, आत्मिक आनंद एवं गुरु भक्ति का अनुपम अनुभव कराया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के पूज्य ब्रह्मलीन परम पूज्य 1008 स्वामी विष्णु तीर्थ महाराज, ब्रह्मलीन परम पूज्य 1008 स्वामी शिवोम् तीर्थ महाराज तथा ब्रह्मलीन परम पूज्य 1008 स्वामी भास्करानंद तीर्थ महाराज का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उनके बताए साधना, सेवा, त्याग और आध्यात्मिक जीवन के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
गुरुपूर्णिमा महोत्सव का यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रेरक संदेश देने वाला एक भव्य आध्यात्मिक उत्सव बनकर उभरा। श्रद्धालुओं के अनुसार ऐसे आयोजन समाज में संस्कार, सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

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