सर्फ़ मित्र को सर्फ के डसने से हुई मौत

Revanchal
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कलेक्टर के निर्देश कागज़ों तक सीमित? समुचित इलाज के अभाव में सर्प मित्र की मौत ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल


सैकड़ों लोगों और हजारों सांपों की जान बचाने वाला अमन नहीं बचा सका अपनी जान, एंटी-वेनम और उपचार व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल


दैनिक रेवांचल टाइम्स | बिछिया (मंडला)।
बरसात के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिला कलेक्टर ने कुछ समय पहले ही सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम इंजेक्शन उपलब्ध रखने तथा सर्पदंश पीड़ितों का तत्काल उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये निर्देश केवल सरकारी फाइलों और बैठकों तक ही सीमित रह गए?


जिले के प्रसिद्ध सर्प मित्र अमन उर्फ बाबी गोहिया, पिता नारायण गोहिया, निवासी भुआ बिछिया की सर्पदंश के बाद उपचार के दौरान मौत ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, घुटास रोड स्थित यात्री प्रतीक्षालय में एक कोबरा का रेस्क्यू करते समय डिब्बे में बंद करने के दौरान कोबरा ने अमन को डस लिया। उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिछिया ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत बिगड़ने पर जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।


जो दूसरों की जान बचाता रहा, उसे नहीं मिला जीवन बचाने वाला इलाज?
अमन गोहिया केवल एक सर्प मित्र नहीं थे, बल्कि समाज सेवा का पर्याय थे। उन्होंने वर्षों तक सैकड़ों लोगों की जान बचाई और हजारों विषैले एवं गैर-विषैले सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें जंगलों में छोड़कर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इसी योगदान के लिए गत वर्ष 26 जनवरी को उन्हें सम्मानित भी किया गया था।


लेकिन विडंबना देखिए कि जो व्यक्ति दूसरों की जान बचाने के लिए हर जोखिम उठाता रहा, वही समय पर प्रभावी उपचार के अभाव में जिंदगी की जंग हार गया।
अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल…
यदि कलेक्टर के निर्देशों के अनुसार सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम और आवश्यक संसाधन उपलब्ध थे, तो आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि मरीज को रेफर करना पड़ा?
क्या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश जैसे गंभीर मामलों से निपटने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है?


यदि व्यवस्था थी, तो उसका लाभ मरीज को क्यों नहीं मिला?
क्या हर गंभीर घटना के बाद केवल जांच के आदेश देना ही प्रशासनिक जवाबदेही का अंत बन गया है?


स्वास्थ्य व्यवस्था पर जनता का भरोसा डगमगाने लगा
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि कई सरकारी अस्पतालों में न पर्याप्त डॉक्टर हैं, न जरूरी दवाइयां और न ही आपातकालीन उपचार की समुचित व्यवस्था। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर करना मजबूरी बन जाता है और कई बार यही देरी जानलेवा साबित होती है।
जनता के बीच यह सवाल भी गूंज रहा है कि जब जिम्मेदार मंत्री का गृह जिला होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति है, तो दूरदराज़ के अन्य क्षेत्रों की हालत का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
केवल जांच नहीं, जवाबदेही भी तय हो
अमन गोहिया की मौत केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगा गंभीर प्रश्नचिह्न है। यदि वास्तव में उपचार में किसी स्तर पर लापरवाही, संसाधनों की कमी या निर्देशों के पालन में चूक हुई है, तो केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी। दोषियों की जवाबदेही तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुधारात्मक कदम उठाना भी उतना ही आवश्यक है।


क्योंकि हर बार एक मौत के बाद जांच का आश्वासन और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल देना न तो मृतक के परिवार के साथ न्याय है और न ही उन हजारों लोगों के साथ, जो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा करके अस्पतालों तक पहुंचते।

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