रक्षाबंधन पर उमड़ी भीड़, बम्हनी बंजर स्टेशन की बदहाली ने खोली रेल सुविधाओं की पोल
जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर उठे सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, बम्हनी बंजर रक्षाबंधन के पर्व पर 27 अगस्त को बम्हनी बंजर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ ने एक बार फिर क्षेत्र की बदहाल रेल सुविधाओं की तस्वीर सामने ला दी। महंगाई के इस दौर में आम आदमी के लिए रेल यात्रा सबसे किफायती साधनों में से एक है, लेकिन जब त्योहारों के समय यात्रियों की संख्या बढ़ती है तो पर्याप्त कोच, टिकट और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यही सफर परेशानी और जोखिम में बदल जाता है। नैनपुर-मंडला फोर्ट रेलखंड पर रक्षाबंधन के चलते बहनों, परिवारों, किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों की बड़ी संख्या में आवाजाही रही।इसके बावजूद मंडला फोर्ट-छिंदवाड़ा तथा मंडला फोर्ट-जबलपुर पैसेंजर ट्रेनों में अतिरिक्त सामान्य कोच नहीं बढ़ाए गए। ऐसे में यात्रियों को भीड़ के बीच सफर करने को मजबूर होना पड़ा। सवाल यह है कि जब त्योहारों पर यात्रियों की संख्या बढ़ने की जानकारी पहले से रहती है, तो रेल प्रशासन की ओर से अतिरिक्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
टिकट की किल्लत ने बढ़ाई परेशानी
बम्हनी बंजर स्टेशन पर अनारक्षित टिकट के रोल खत्म होने की बात भी सामने आई। इससे दूर-दराज के गांवों से स्टेशन पहुंचे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आम यात्री पहले ही महंगाई की मार झेल रहा है और यदि सस्ता एवं सुलभ रेल परिवहन भी अव्यवस्थाओं का शिकार हो जाए तो उसकी परेशानी और बढ़ जाती है।
कभी गुड्स यार्ड, आज सुविधाओं से वंचित हाल्ट
रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी सहित स्थानीय लोगों का कहना है कि बम्हनी बंजर का रेलवे इतिहास काफी महत्वपूर्ण रहा है। छोटी लाइन के दौर में यह क्षेत्र अनाज, वन्य उपज, खाद, सीमेंट और डोलोमाइट जैसी सामग्री की ढुलाई के लिए महत्वपूर्ण गुड्स यार्ड और व्यापारिक केंद्र के रूप में जाना जाता था। कभी जहां रेलवे की गतिविधियां और व्यापारिक आवाजाही प्रमुख थी, वहीं आज स्टेशन सीमित सुविधाओं वाले हाल्ट के रूप में सिमट गया है।स्थानीय लोगों के अनुसार स्टेशन के आसपास रेलवे की पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। बिचुआ रेलवे पार पुल से ढेंको पार पुल तक लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में रेल भूमि होने का दावा किया जा रहा है, जहां भविष्य में अतिरिक्त लाइन और लंबे प्लेटफॉर्म जैसी सुविधाओं के विकास की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
बम्हनी बंजर की समस्या केवल एक रेलवे स्टेशन की समस्या नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के हजारों लोगों के आवागमन, शिक्षा, रोजगार और व्यापार से जुड़ा विषय है। इसके बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से स्टेशन के विकास को लेकर प्रभावी पहल नजर नहीं आने पर अब सवाल उठने लगे हैं।
जब चुनाव के समय सड़क, रेल और विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, तो फिर वर्षों से चली आ रही रेलवे सुविधाओं की मांगों पर ठोस पहल क्यों नहीं होती? क्या बम्हनी बंजर की आवाज इतनी कमजोर है कि उसे रेल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने वाला कोई नहीं?
पूर्ण विकसित स्टेशन की मांग
समाजसेवी अनिरुद्ध शुक्ला (महाराज ) का कहना है कि बम्हनी बंजर को पूर्ण विकसित रेलवे स्टेशन बनाने के लिए रेल प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। वहीं युवा सामाजिक कार्यकर्ता स्वप्निल कुमार ने दो पर्याप्त लंबाई वाले हाई-लेवल प्लेटफॉर्म, पक्का यात्री शेड, पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और स्थायी यूटीएस टिकट काउंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बम्हनी बंजर स्टेशन को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाता है तो मंडला जिले के ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। अब सवाल रेल प्रशासन से ज्यादा उन जनप्रतिनिधियों से है, जिनके क्षेत्र में जनता वर्षों से बेहतर रेल सुविधा की उम्मीद लगाए बैठी है। रक्षाबंधन की भीड़ ने कम से कम इतना तो साफ कर दिया कि बम्हनी बंजर को नजरअंदाज करने का समय अब खत्म होना चाहिए।
