दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला | नैनपुर
नैनपुर तहसील अंतर्गत नगर क्षेत्र एवं आसपास की ग्राम पंचायतों में अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन की नाक के नीचे यह पूरा खेल खुलेआम चल रहा है। जिम्मेदार अधिकारी होने के बावजूद न तो तहसीलदार नैनपुर की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है और न ही अवैध कॉलोनाइजरों पर कानून का शिकंजा कसता नजर आ रहा है।
इससे तहसील प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।
वही स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि बिना लेआउट स्वीकृति, बिना डायवर्जन और बिना टीएनसीपी (TNCP) की अनुमति के कॉलोनाइजर खुलेआम प्लॉटिंग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, नहर की भूमि और शासकीय जमीनों पर भी अवैध कॉलोनियों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
सीएम हेल्पलाइन बनी मज़ाक, पटवारी बिना जांच शिकायतें कर रहा बंद

सबसे गंभीर आरोप यह है कि सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज अवैध कॉलोनियों की शिकायतों को पटवारी प्रदीप उसराठे बिना मौके की जांच किए ही बंद कर रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति की जा रही है और आवेदकों के विरुद्ध ही गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, राजस्व अमले का अवैध कॉलोनाइजरों को अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है। चर्चा है कि वसूली का पूरा सिस्टम सक्रिय है, जिसके लिए बाकायदा दलाल नियुक्त किए गए हैं, जो समय-समय पर अवैध कॉलोनाइजरों से रकम वसूलते हैं। इसी संरक्षण के चलते कॉलोनाइजर बेखौफ होकर जमीनों की खरीद-फरोख्त और प्लॉटिंग कर रहे हैं।
SDM का आदेश भी बेअसर, तहसीलदार मौन
जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नैनपुर द्वारा पिंडरई की अवैध कॉलोनी की शिकायत पर दिनांक 06/12/2025 को कार्रवाई हेतु पत्र जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद तहसीलदार नैनपुर द्वारा आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। सवाल यह उठता है कि—
क्या तहसीलदार को अवैध कॉलोनियों की जानकारी नहीं है?
या फिर जानबूझकर कार्रवाई से बचा जा रहा है?
वही पूरे नैनपुर नगर में चर्चा है कि तहसीलदार और पटवारी प्रदीप उसराठे मिलकर मामलों को दबाने और वसूली में जुटे हुए हैं, जिससे पूरा राजस्व तंत्र संदेह के घेरे में आ गया है।
नोटिस तक सीमित जिला प्रशासन, कार्रवाई शून्य
वही जिला प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब तक केवल नोटिस बांटकर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि न तो अवैध कॉलोनियों पर ध्वस्तीकरण हुआ और न ही कॉलोनाइजरों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। इससे यह संदेह और गहरा होता है कि क्या यह सब उच्च अधिकारियों की निगरानी में हो रहा है?
कब दर्ज होगा अपराध?
जनता पूछ रही सवाल…..
नैनपुर नगर और आसपास की ग्राम पंचायतों में अवैध कॉलोनियों का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसीलदार और एसडीएम स्तर पर यदि समय रहते कठोर कदम उठाए जाते, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते। अब जनता पूछ रही है कि—
नैनपुर एसडीएम अवैध कॉलोनियों पर आपराधिक प्रकरण कब दर्ज कराएंगे?
इनका कहना है —
हरेंद्र मसराम
जनपद सदस्य, वन सभापति मंडला एवं समाजसेवी
“मेरे द्वारा जिला कलेक्टर मंडला को शिकायत की गई थी, जिस पर एसडीएम नैनपुर ने कार्रवाई के आदेश भी जारी किए। इसके बावजूद तहसीलदार नैनपुर द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। सूत्रों से जानकारी है कि एक पटवारी के साथ मिलकर मामले को दबाया जा रहा है।”
सुजीत कुमार प्रजापति
अधिवक्ता, नैनपुर (मंडला)
“मैंने नैनपुर नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों की अवैध कॉलोनियों की लिखित शिकायत और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पटवारी प्रदीप उसराठे बिना जांच किए ही शिकायत बंद कर देता है और गलत जानकारी पेश करता है। ऐसे पटवारी पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।”
निष्पक्ष जांच की मांग
नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कलेक्टर मंडला एवं संभागीय आयुक्त से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध कॉलोनाइजरों के साथ-साथ संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक मौन साधे रहता है, या फिर जनता की आवाज सुनकर कोई ठोस और निर्णायक कदम उठाता है।
