: रामा परते
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता रामा परते ने जिले की महिलाओं और नारी शक्ति को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस महिलाओं के साहस, संघर्ष और समाज में उनके अमूल्य योगदान को सम्मान देने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि हर महिला के भीतर अपार क्षमता और शक्ति छिपी होती है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की है।
विकासखंड मोहगांव की ग्राम पंचायत कौआडोंगरी के पोषक ग्राम सकरी की सामाजिक कार्यकर्ता रामा परते ने कहा कि सशक्त नारी ही समाज और परिवार की मजबूत नींव होती है। जो महिलाएं खुद पर विश्वास करती हैं और अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं, वही समाज में बदलाव की नई इबारत लिखती हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही नारी को शक्ति स्वरूप माना गया है। वेद, शास्त्र और पुराणों में नारी को लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती के रूप में सम्मान दिया गया है। नारी केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी सोच, प्रतिभा और आत्मबल समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।
रामा परते ने महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपनी उम्र, परिस्थिति और जिम्मेदारियों को बाधा न बनने दें, बल्कि अपनी क्षमताओं को पहचानते हुए आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित और जागरूक महिला पूरे परिवार और समाज के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। महिलाएं कविता, संगीत, नृत्य, लेखन, खेल या अन्य किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की दिशा में कदम बढ़ाती हैं, तो समाज में प्रेरणादायक वातावरण बनता है और नई सोच का निर्माण होता है।
अंत में उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा—
“बेटा तन है तो बेटी मन है,
बेटा वंश है तो बेटी अंश है।
बेटा आन है तो बेटी शान है,
बेटा मान है तो बेटी गुमान है।
बेटा वारिस है तो बेटी पारस है,
बेटा संस्कार है तो बेटी संस्कृति है।
बेटा भाग्य है तो बेटी विधाता है,
बेटा दवा है तो बेटी दुआ है।
बेटा शब्द है तो बेटी अर्थ है,
बेटा राग है तो बेटी बाग है।
बेटा गीत है तो बेटी संगीत है,
बेटा हीरा है तो बेटी मोती है।”
— रामा परते
सामाजिक कार्यकर्ता
विकासखंड मोहगांव, जिला मंडला
