बारिश से पहले मिट्टी माफियाओं का तांडव, बालई नदी का सीना चीर रहे जेसीबी

Revanchal
6 Min Read

रातभर दौड़ रहे ट्रैक्टर, जिम्मेदार विभाग बने मूकदर्शक, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा अवैध उत्खनन का खेल


रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला
मानसून आने से पहले मुख्यालय नारायणगंज क्षेत्र में मिट्टी माफियाओं का आतंक चरम पर पहुंच गया है। ईंट भट्टों के लिए बालई नदी किनारे और डूब क्षेत्रों से धड़ल्ले से मिट्टी का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। रात के अंधेरे में जेसीबी मशीनें धरती का सीना चीर रही हैं और ट्रैक्टरों के जरिए हजारों घनफीट मिट्टी का अवैध परिवहन खुलेआम हो रहा है, लेकिन पुलिस, राजस्व और माइनिंग विभाग की आंखों पर मानो पर्दा पड़ा हुआ है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा काला कारोबार फल-फूल रहा है।


क्षेत्र में इन दिनों शाम ढलते ही मिट्टी माफियाओं की गतिविधियां तेज हो जाती हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार रातभर जेसीबी मशीनों की गड़गड़ाहट और ट्रैक्टरों की आवाजें सुनाई देती हैं। बालई नदी के किनारे मौजूद कापू मिट्टी को ईंट निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है और इसी लालच में नदी किनारों को बेरहमी से खोदा जा रहा है। बारिश शुरू होने के बाद जलभराव के कारण मिट्टी निकालना मुश्किल हो जाता है, इसलिए माफिया अभी से बड़े पैमाने पर मिट्टी का भंडारण कर रहे हैं।


स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कई स्थानों पर नदी किनारों और सरकारी जमीनों को गहरी खाइयों में तब्दील कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाएगा, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मवेशियों और बच्चों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को शायद किसी अनहोनी का इंतजार है।आरोप है कि अवैध उत्खनन का यह खेल कोई नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब मिट्टी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे बिना किसी डर के खुलेआम मशीनें चलवा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में सख्त होता तो रातभर ट्रैक्टरों की कतारें सड़कों पर दिखाई नहीं देतीं।


सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रातभर दर्जनों की संख्या में ट्रैक्टर गांव और मुख्य मार्गों से गुजरते हैं, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती। आखिर कैसे संभव है कि इतनी बड़ी मात्रा में मिट्टी का परिवहन हो रहा हो और जिम्मेदार विभाग अनजान बने रहें है क्या यह केवल लापरवाही है या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा संरक्षण काम कर रहा है?


राजस्व विभाग और माइनिंग विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सूत्रों के मुताबिक कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। न तो जेसीबी मशीनें जब्त हुईं और न ही अवैध परिवहन में लगे ट्रैक्टरों पर प्रभावी कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय मिलीभगत के कारण ही मिट्टी माफिया बेखौफ होकर सरकारी जमीन और नदी तटों को खोद रहे हैं।


क्षेत्रवासियों का कहना है कि नियमों के अनुसार मिट्टी उत्खनन के लिए अनुमति और रॉयल्टी अनिवार्य है, लेकिन यहां खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बिना परमिट ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं, बिना अनुमति जेसीबी मशीनें चल रही हैं और प्रशासन केवल तमाशा देख रहा है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अवैध कारोबारियों को कहीं न कहीं संरक्षण जरूर प्राप्त है।
पर्यावरण के लिहाज से भी यह स्थिति बेहद खतरनाक मानी जा रही है। नदी किनारों की अंधाधुंध खुदाई से जलस्रोतों का संतुलन बिगड़ सकता है।

बरसात के दौरान मिट्टी कटाव बढ़ने से नदी का प्रवाह प्रभावित होगा और आसपास की जमीनों को भी नुकसान पहुंचेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में इसका गंभीर पर्यावरणीय दुष्परिणाम सामने आ सकता है।


सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध मिट्टी उत्खनन में लगे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही अवैध परिवहन में उपयोग हो रहे ट्रैक्टरों और जेसीबी मशीनों को तत्काल जब्त किया जाए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि पुलिस, राजस्व और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम बनाकर रात में लगातार कार्रवाई की जाए ताकि मिट्टी माफियाओं पर लगाम लग सके।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस पूरे मामले में कब तक चुप्पी साधे रहता है। क्या जिम्मेदार विभाग अवैध उत्खनन के इस खेल को यूं ही चलते रहने देंगे, या फिर मिट्टी माफियाओं पर कोई बड़ी कार्रवाई होगी। फिलहाल नारायणगंज में हालात यह हैं कि मिट्टी माफिया बेखौफ हैं और प्रशासन की निष्क्रियता ने उनके हौसले आसमान पर पहुंचा दिए हैं।

👁️ 1 views Views
Share This Article
Translate »