दैनिक रेवांचल टाइम्स | बिछिया (मंडला)
बिछिया क्षेत्र की शराब दुकानों में इन दिनों एक अनोखी आर्थिक नीति लागू होती दिख रही है। यहां बोतलों पर छपा MRP सिर्फ सजावट के लिए नजर आता है, जबकि असली कीमत दुकानदार की इच्छा, ग्राहक की मजबूरी और जिम्मेदारों की चुप्पी देखकर तय होती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शराब दुकानों पर 20 से 100 रुपये तक अतिरिक्त वसूली खुलेआम की जा रही है। मजे की बात यह कि न तो दुकानों पर रेट लिस्ट दिखाई देती है और न ही खरीददार को बिल मिलता है। यानी ग्राहक पैसा भी ज्यादा दे और सबूत भी न रख पाए — क्या शानदार व्यवस्था है!
अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह कौन सा नया गणित है?
बोतल पर एक रेट, काउंटर पर दूसरा रेट और वसूली का हिसाब शायद किसी तीसरी किताब में!
लगता है बिछिया की शराब दुकानों ने अर्थशास्त्र का नया अध्याय लिख दिया है—
“MRP = मैक्सिमम रिटेल प्राइज (Maximum Retail Price) नहीं, बल्कि मनमाना रेट प्राइस!”
जिले के आबकारी विभाग की कार्यशैली भी कम दिलचस्प नहीं। ऐसा प्रतीत होता है मानो विभागीय अधिकारी किसी विशेष शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे हों, तभी कार्रवाई होगी। जब सब कुछ खुलेआम हो रहा है तो फिर जांच किस बात की?
जनता पूछ रही है—
रेट लिस्ट क्यों गायब है साहब?
MRP से ज्यादा वसूली पर कार्रवाई कब होगी साहब?
आखिर क्या वजह हैं किजिम्मेदार मौन हैं?
या फिर उपभोक्ताओं को लूटने की खुली छूट दे दी गई है?
यदि हर बोतल पर अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रतिदिन कितनी बड़ी अवैध कमाई घुघरी के साथ ही जिले की अन्य शराब दुकानों पर हो रही होगी। उपभोक्ता अधिकारों की धज्जियां उड़ रही हैं और जिम्मेदार मानो आंखें मूंदे बैठे हैं।
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि सभी शराब दुकानों की तत्काल जांच हो, रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से लगाई जाए और नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। वरना जनता का गुस्सा किसी दिन ऐसा नशा चढ़ाएगा, जो उतारना प्रशासन के लिए मुश्किल हो जाएगा।
