निर्माण एजेंसी वर्धमान ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की बनी वारिश ने सड़क की गुणवत्ता खुली पोल

Revanchal
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करोड़ों की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पहली बारिश में धराशायी!

क्या विभाग–ठेकेदार की कथित मिलीभगत ने आदिवासियों की जिंदगी से किया खिलवाड़?

दो साल भी नहीं टिक सकी सड़क और पुलिया, जंगलों में रहने वाले आदिवासियों की आवाजाही पर संकट, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला जिले के आदिवासी अंचलों में विकास के नाम पर आखिर चल क्या रहा है? करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई जा रही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कें यदि पहली ही बारिश में दम तोड़ दें, तो इसे विकास कहा जाए या सरकारी धन की बर्बादी?
घुघरी विकासखंड के घोरेघाट–धनोली मार्ग पर पहली ही बारिश ने निर्माण की पूरी कहानी उजागर कर दी। करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क और पुलिया के किनारे बह गए, सुरक्षा परत उखड़ गई और निर्माण सामग्री खुलकर सामने आ गई। इससे सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर निर्माण के समय गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा था?


ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी वर्धमान ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। उनका कहना है कि यदि गुणवत्ता की सही निगरानी होती तो पहली ही बारिश में पुलिया की यह दुर्दशा नहीं होती।


सबसे अधिक परेशानी उन दूरस्थ जंगलों में रहने वाले आदिवासी परिवारों को झेलनी पड़ रही है, जिनके लिए यही सड़क अस्पताल, स्कूल, बाजार और जिला मुख्यालय तक पहुंचने का एकमात्र सहारा है। बारिश के मौसम में पुलिया क्षतिग्रस्त होने से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। सवाल यह है कि क्या आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता इसलिए किया जा रहा है क्योंकि यहां आवाज उठाने वाला कोई नहीं?


निर्माण की लागत करोड़ों में, ऊपर से पांच वर्षों के संधारण के लिए भी अलग से राशि स्वीकृत है। इसके बावजूद यदि सड़क दो वर्ष भी नहीं टिक पाती तो यह केवल तकनीकी कमी नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।


जनता पूछ रही है— क्या गुणवत्ता परीक्षण केवल फाइलों में हुआ? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था? यदि किया था तो पहली बारिश में निर्माण क्यों बह गया?


यदि आरोप सही हैं, तो यह केवल एक पुलिया का मामला नहीं बल्कि जनहित, सरकारी धन और आदिवासी क्षेत्रों के विकास के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि इस पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही, घटिया निर्माण या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित ठेकेदार, गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।


पहली ही बारिश ने सड़क नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की गुणवत्ता पर निगरानी करने वाली पूरी व्यवस्था की परीक्षा ले ली है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार जवाबदेह बनते हैं या फिर करोड़ों की इस कहानी पर भी जांच की धूल डाल दी जाएगी।


इनका कहना है….
मुझे आपके माध्यम से जानकारी लग रही है हम दिखावा लेते पर आप जो बतला रहे है शायद पुरानी सड़क है पहले ही उसमें कार्य हुआ है और वर्धमान ग्लोवल तो पुराने ठेकेदार है ऐसी लापरवाही तो नही कर सकते है फिर हम दिखवा लेते है।


उषा चौधरी
महाप्रबंधक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना मंडला




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