पहली ही बारिश में बह गए नगर पालिका के दावे!

Revanchal
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नालियां हुईं गायब, सड़कें बनीं नदी… AC दफ्तरों में बैठा प्रशासन देखता रहा तमाशा

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला
मंडला नगर पालिका की “साफ-सुथरे शहर” की हकीकत पहली ही मानसूनी बारिश ने सरेआम उजागर कर दी। कुछ देर की बारिश ने ही शहर की व्यवस्था की ऐसी पोल खोली कि नालियां अपना अस्तित्व भूल गईं और सड़कें नदी में तब्दील हो गईं। कई स्थानों पर गंदा पानी घरों तक पहुंच गया, जबकि नालियों का कचरा सड़कों पर तैरता नजर आया।


शहरवासियों का कहना है कि यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नगर पालिका की लापरवाही का नतीजा है। बरसात से पहले नालों और नालियों की सफाई के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि पहली बारिश ने ही उन दावों को पानी में बहा दिया।


आरोप लग रहे हैं कि नगर पालिका में करोड़ों रुपये सफाई, नाला-नाली और सड़क मरम्मत के नाम पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन शहर के अधिकांश वार्ड आज भी गंदगी, जलभराव और बदहाल सड़कों की मार झेल रहे हैं। यदि समय पर सफाई और रखरखाव हुआ होता, तो शायद पहली ही बारिश में शहर को “तालाब” बनने की नौबत नहीं आती।


बुधवारी बाजार सहित कई इलाकों में कुछ देर की बारिश के बाद ही सड़कें जलमग्न हो गईं। लोगों को पैदल चलना मुश्किल हो गया, दुकानों और घरों में पानी घुसने से परेशानी बढ़ गई। सवाल यह है कि जब हर साल बरसात आती है, तो नगर पालिका हर साल बिना तैयारी के क्यों दिखाई देती है?


अब शहर में तंज कसा जा रहा है कि शायद नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी गजानंद नाफ़डे का नया विकास मॉडल यही है—”जहां नालियां बहनी थीं, वहां सड़कें बहेंगी और जहां अधिकारी पहुंचने चाहिए, वहां सिर्फ फाइलें पहुंचेंगी।”
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब से जिम्मेदार अधिकारी गजानंद नाफ़डे जिले में पदस्थ हुए हैं तभी से शहर की नालियों के ऊपर अतिक्रमण किया गया हैं। और जिम्मेदार अधिकारी केवल वातानुकूलित कार्यालयों में बैठकर कागजों पर शहर को चमकाने का काम इनके द्वारा किया जा रहा हैं, जबकि जमीनी हकीकत में नागरिक गंदगी, जलभराव और बदहाल व्यवस्थाओं से जूझ रहें हैं।


अब आम नागरिकों की निगाहें जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर हैं। क्या नगर पालिका की कार्यप्रणाली की जवाबदेही तय होगी, या पहली बारिश की तरह यह मामला भी कुछ दिनों बाद ठंडा पड़ जाएगा? ऐसा नहीं हैं कि शहर में सिर्फ अतिक्रमण की वजह से बस जल भराव हुआ हो साफ सफाई के घोड़े भी शायद सिर्फ कागजों में जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा दौड़ा दिए गए हैं। फिलहाल तो पहली बारिश ने इतना जरूर साबित कर दिया है कि शहर की नालियां नहीं, बल्कि नगर पालिका और जिम्मेदार अधिकारी के दावे बह रहे हैं।

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