5 किमी सड़क, 10 साल का इंतजार — ठेकेदार को संरक्षण, जनता बेबस

Revanchal
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PWD की मिलीभगत से लफरा–कटंगाटोला मार्ग बना भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला।
लोक निर्माण विभाग (PWD) मंडला में भ्रष्टाचार अब सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि सड़कों पर साफ दिखाई देने वाली सच्चाई बन चुका है। वर्ष 2014 में स्वीकृत लफरा–कटंगाटोला मार्ग (लंबाई 5 किमी, लागत 347.02 लाख) आज 10 साल बाद भी अधूरा पड़ा है। जिस सड़क को महज 10 माह में पूरा होना था, वह आज तक पूरी नहीं हो सकी—और जिम्मेदार अधिकारी व ठेकेदार खुलेआम बचते नजर आ रहे हैं।


इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी ओम साई ट्रेडर्स, जबलपुर को दी गई थी, जबकि निगरानी की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग, मंडला की थी। उपयंत्री, उपमंडल अधिकारी से लेकर कार्यपालन यंत्री तक की पूरी श्रृंखला मौजूद रही—फिर भी न गुणवत्ता दिखी, न जवाबदेही।


सड़क बनी भी तो टूट गई, जो बचा है वो अधूरा पड़ा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण शुरू होते ही जगह-जगह से उखड़ने लगी थी। कई हिस्सों में आज भी सीसी रोड अधूरी पड़ी है। हालत यह है कि यह मार्ग अब सुविधा नहीं, बल्कि दुर्घटना का कारण बन चुका है।
10 महीने का काम, 10 साल में भी नहीं — आखिर जिम्मेदार कौन?


सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार को वर्षा काल छोड़कर 10 माह में कार्य पूरा करना था, लेकिन 10 साल बीतने के बाद भी सड़क अधूरी है। सवाल यह है कि:
क्या विभाग ने कभी ठेकेदार पर पेनाल्टी लगाई? क्या ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई हुई? या फिर “कमीशन” के खेल में फाइलें दबा दी गईं?


जनता परेशान, जनप्रतिनिधि मौन
इस मार्ग से सैकड़ों गांव जुड़े हुए हैं और यह रास्ता कान्हा क्षेत्र तक आवागमन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बावजूद इसके, न विधायक ने आवाज उठाई, न सांसद और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने इस गंभीर लापरवाही पर कोई ठोस कदम उठाया।


हादसा होगा तब जागेगा प्रशासन? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
वही जब-जब हादसे होते हैं, तब अधिकारी मौके पर पहुंचकर “हमदर्दी” जताते हैं, लेकिन सालों से चल रही इस लापरवाही पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं?


मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद न विभाग के कानों पर जूं रेंग रही है और न ही जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को प्राथमिकता दे रहा है।


विकास” या भ्रष्टाचार का खेल?
यह कैसा विकास है, जहां 5 किलोमीटर सड़क 7-8 साल नहीं, बल्कि 10 साल में भी पूरी नहीं हो पा रही?
सरकारी धन खर्च हो रहा है, ठेकेदार और अधिकारी लाभ में हैं, और आम जनता बदहाल सड़कों पर जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर है।


मांग: अब कार्रवाई नहीं तो जवाब चाहिए
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि:
ठेकेदार को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए नए सिरे से टेंडर जारी कर कार्य पूरा कराया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो
अब जिला प्रशासन को तय करना होगा—जनहित बड़ा है या ठेकेदार–विभाग का गठजोड़?

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