छिंदवाड़ा में बिखरी मप्र की शिल्पकला की छटा: ₹5 से लेकर ₹16 हजार तक की तुलसी माला बनी आकर्षण का केंद्र
रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
शहर के परासिया रोड स्थित पूजा लॉन में शनिवार से मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक शिल्पकला का भव्य संगम शुरू हो गया है। मध्य प्रदेश शासन के ग्रामोद्योग विभाग के प्रायोजन में, मध्य प्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम द्वारा आयोजित ऐतिहासिक ‘मृगनयनी मध्य प्रदेश प्रदर्शनी 2026’ का भव्य उद्घाटन 6 जून की शाम 6 बजे जिला कलेक्टर हरेंद्र नारायण के कर-कमलों द्वारा किया गया।
यह खास प्रदर्शनी आगामी 16 जून तक रोजाना दोपहर 12:00 बजे से रात 9:00 बजे तक आम जनता और कला प्रेमियों के लिए खुली रहेगी। उद्घाटन के इस गरिमामयी अवसर पर प्रदर्शनी प्रभारी अरविंद शर्मा, बी. एस. वर्मा, मृगनयनी शोरूम के प्रभारी ब्रांडेकर सहित प्रदेशभर से आए बुनकर और शिल्पकार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
स्थापत्य कला के नए डिजाइनों से सजी चंदेरी और महेश्वरी साड़ियां
इस बार की प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण स्थापत्य कला के नवनिर्मित डिजाइनों से तैयार की गई पारंपरिक चंदेरी साड़ियां हैं, जिनमें जरी और रेशम के किनारों की बेहद खूबसूरत बुनाई की गई है। इसके साथ ही हैंडलूम के शौकीनों के लिए महेश्वरी, वारासिवनी और सौसर की प्रसिद्ध साड़ियां व ड्रेस मटेरियल सिल्क बुनाई के साथ उपलब्ध कराए गए हैं। प्रदेश की धरोहर माने जाने वाले उज्जैन का प्रसिद्ध बाटिक प्रिंट और धार जिले का पारंपरिक बाघ प्रिंट भी यहां बिखरी अनूठी छटा का केंद्र बना हुआ है।
तुलसी की माला बनी मुख्य आकर्षण, ₹5 से ₹16,000 तक की वैरायटी
प्रदर्शनी में इस बार सबसे अनूठा और आकर्षक केंद्र ‘तुलसी की माला’ है। यहां भक्तों और कला पारखियों के लिए मात्र ₹5 से शुरू होकर ₹16,000 तक की बेशकीमती और बेहद बारीक नक्काशी वाली तुलसी की मालाएं उपलब्ध हैं, जो लोगों के बीच भारी कौतूहल और आकर्षण का विषय बनी हुई हैं।
35 से अधिक राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय शिल्पकार पहुंचे
मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए करीब 30 से 35 हुनरमंद कारीगर और बुनकर अपनी सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियों के साथ इस प्रदर्शनी में हिस्सा ले रहे हैं। एक ही छत के नीचे प्रदेश के विभिन्न अंचलों का हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद मिलना छिंदवाड़ा वासियों के लिए एक बेहतरीन अवसर है।
आयोजकों ने समस्त शहरवासियों से इस भव्य प्रदर्शनी में पहुंचकर स्थानीय शिल्पकारों का उत्साहवर्धन करने और उत्कृष्ट मप्र की कला को अपने घरों का हिस्सा बनाने की अपील की है।
