रेवांचल टाइम्स मंडला। मध्यप्रदेश शासन वन विभाग द्वारा आयोजित प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना-2026 के अंतर्गत द्वितीय चरण में ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना का कार्य गुरुवार 22 मई 2026 से प्रारंभ हो गया। इसी क्रम में कान्हा टाइगर रिजर्व अंतर्गत कोर एवं बफर वनमंडल तथा फेन वाइल्डलाइफ सेंचुरी के समस्त 13 परिक्षेत्रों में तीन दिवसीय विशेष गिद्ध गणना अभियान की शुरुआत की गई। वन विभाग द्वारा संचालित यह अभियान क्षेत्र में गिद्धों की वास्तविक संख्या, उनकी प्रजातियों तथा आवासीय परिस्थितियों के वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गिद्ध गणना अभियान के प्रथम दिन सुबह 5:30 बजे से ही वन विभाग का अमला सक्रिय हो गया। सभी परिक्षेत्रों की कुल 182 बीटों में वनकर्मी, वनरक्षक एवं अन्य मैदानी कर्मचारी निर्धारित स्थलों पर पहुंचकर गिद्धों की पहचान और गणना कार्य में जुट गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार गणना कार्य पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति से किया जा रहा है, जिसमें मोबाइल एप्लीकेशन तथा डाटा शीट का उपयोग किया जा रहा है। इससे एकत्रित आंकड़ों का विश्लेषण कर क्षेत्र में गिद्धों की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सकेगा।
वन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रथम दिवस की गणना में कान्हा, किसली, मुक्की एवं सरही परिक्षेत्रों में भारतीय गिद्ध तथा सफेद पीठ वाले गिद्धों की कुल 306 संख्या दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या क्षेत्र में गिद्धों की उपस्थिति और उनके संरक्षण के प्रयासों के सकारात्मक परिणामों की ओर संकेत करती है। विशेष रूप से सफेद पीठ वाले गिद्धों की उपस्थिति वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए उत्साहजनक मानी जा रही है, क्योंकि यह प्रजाति लंबे समय से संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं। ये मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। गिद्धों की संख्या में कमी आने से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होता है तथा कई प्रकार की बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि राज्य शासन द्वारा गिद्ध संरक्षण और उनकी नियमित गणना को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
अभियान के दौरान वन विभाग द्वारा गिद्धों के घोंसलों, उनके आवास क्षेत्रों तथा भोजन उपलब्धता का भी अध्ययन किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में गिद्धों की गतिविधियों का बेहतर अवलोकन संभव होता है, जिससे उनकी वास्तविक संख्या का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। यह गणना आगामी दो दिनों तक लगातार जारी रहेगी और इसके बाद विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा।
वन विभाग ने बताया कि इस ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य में गिद्ध संरक्षण की रणनीति तैयार करने में सहायक सिद्ध होंगे। साथ ही इससे वन्यजीव प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण एवं प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए आवश्यक योजनाएं बनाने में भी मदद मिलेगी। क्षेत्रीय नागरिकों एवं पर्यावरण प्रेमियों ने वन विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।
