सरस्वती ज्ञान मंदिर नारायणगंज की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल, योग्य शिक्षकों की कमी के आरोप
प्रधानाचार्य के कथित जवाब से भी बढ़ा विवाद

दैनिक रेवांचल टाइम्स – नारायणगंज/मंडला। शिक्षा के मंदिर में बच्चों के सुरक्षित भविष्य और बेहतर शिक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सरस्वती ज्ञान मंदिर नारायणगंज की कथित व्यवस्थाएं इन दावों पर ही सवाल खड़े करती नजर आ रही हैं। विद्यालय परिसर में जहां बच्चों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त खेल मैदान तक उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है, वहीं परिसर में ट्रैक्टर, जेसीबी, पिकअप, ट्रॉली, लोहे का कबाड़ और अन्य सामान पड़े होने की शिकायतें सामने आई हैं।
सवाल सीधा है—जहां मासूम बच्चों को खेलना और पढ़ना चाहिए, वहां भारी वाहन और कबाड़ क्यों खड़ा है? यदि विद्यालय परिसर में किसी बच्चे के साथ दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
खेल मैदान के बजाय कीचड़ और कबाड़!
बारिश के मौसम में विद्यालय परिसर की स्थिति और भी चिंताजनक होने की बात सामने आई है। बच्चों के खेलने के लिए समुचित स्थान नहीं होने के कारण उन्हें कथित तौर पर कीचड़ भरे परिसर में समय बिताना पड़ता है। दूसरी ओर परिसर में भारी मशीनरी और लोहे का सामान पड़ा होना बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वहीं विद्यालय प्रबंधन से यह सवाल पूछा जाना लाजिमी है कि क्या बच्चों की सुरक्षा से पहले परिसर में मशीनरी और कबाड़ रखना ज्यादा जरूरी है?
एक कमरे में दो-दो कक्षाएं, कैसी पढ़ाई? विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। आरोप है कि एक ही कमरे में दो-दो कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में शिक्षक एक कक्षा को पढ़ाएगा या दूसरी को? बच्चों का ध्यान पढ़ाई पर रहेगा या आसपास चल रही दूसरी कक्षा की आवाजों पर?
यदि एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है तो यह व्यवस्था निश्चित रूप से शिक्षा की गुणवत्ता की जांच का विषय बनती है। शिक्षा विभाग को मौके पर पहुंचकर यह देखना चाहिए कि विद्यालय में वास्तव में कितने कमरे हैं, कितनी कक्षाएं संचालित हो रही हैं और प्रत्येक कक्षा के लिए अलग शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध है या नहीं।
योग्य शिक्षकों को लेकर भी उठे सवाल
विद्यालय में शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और कक्षावार व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि 12वीं पास अथवा संबंधित स्तर के शिक्षक छोटे बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं, जबकि बीएड/डीएड योग्य शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच का विषय है, लेकिन यदि विद्यालय में निर्धारित योग्यता और नियमों के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं तो यह बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
आखिर शिक्षा विभाग विद्यालय की मान्यता, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, शिक्षकों की योग्यता और कक्षावार पदस्थापना की जांच कब करेगा?
सवाल पूछने पर प्रधानाचार्य का कथित जवाब—“जो लगे कर लो, छाप लो”
मामले को और गंभीर बनाने वाला पहलू तब सामने आया जब विद्यालय की व्यवस्थाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर विद्यालय के प्रधानाचार्य नरेंद्र कुशवाहा से सवाल किए गए। आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर कहा—“तुम्हें जो लगे वह कर लो और छाप लो, मुझे फर्क नहीं पड़ता।”
यदि प्रधानाचार्य द्वारा वास्तव में ऐसा जवाब दिया गया है तो यह केवल पत्रकार के सवाल का जवाब नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और विद्यालय की व्यवस्थाओं से जुड़े सवालों के प्रति कथित संवेदनहीनता को दर्शाता है।
विद्यालय प्रबंधन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उक्त कथन प्रधानाचार्य ने दिया था और यदि दिया था तो किस आधार पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को इतनी हल्के में लिया गया?
जांच की आहट से खुलेंगे कई राज?
मामला अब शिक्षा विभाग के संज्ञान में पहुंच चुका है। बीईओ नारायणगंज राजेश विश्वकर्मा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में लाया गया है। उनके अनुसार इस संबंध में जांच दल गठित कर जांच कराई जाएगी तथा जांच प्रतिवेदन वरिष्ठ कार्यालय को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।
अब निगाहें शिक्षा विभाग की जांच पर हैं। सवाल यह है कि जांच केवल कागजों तक सीमित रहेगी या अधिकारी विद्यालय पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा भी लेंगे?
विभाग के सामने खड़े हैं ये बड़े सवाल
विद्यालय परिसर में जेसीबी, ट्रैक्टर, पिकअप, ट्रॉली और लोहे का सामान क्यों रखा गया है?
क्या विद्यालय परिसर में बच्चों की सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है? बच्चों के लिए सुरक्षित खेल मैदान उपलब्ध है या नहीं?
एक कमरे में दो कक्षाएं संचालित किए जाने की शिकायत सही है या नहीं?
विद्यालय में कार्यरत प्रत्येक शिक्षक की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता क्या है? क्या कक्षाओं के संचालन के लिए पर्याप्त योग्य शिक्षक उपलब्ध हैं?
विद्यालय की मान्यता एवं भवन संबंधी निर्धारित मापदंडों का पालन हो रहा है या नहीं? क्या शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में विद्यालय का निरीक्षण किया गया है? यदि हां, तो निरीक्षण में क्या पाया गया?
अब जांच ही बताएगी—व्यवस्था दुरुस्त है या जिम्मेदारी से बचने का खेल?
बच्चों की सुरक्षा कोई ऐसा विषय नहीं है जिसे शिकायत और आरोप-प्रत्यारोप के बीच दबा दिया जाए। एक संभावित दुर्घटना के बाद जांच करने से बेहतर है कि उससे पहले ही खतरों को हटाया जाए। शिक्षा विभाग को चाहिए कि विद्यालय का तत्काल भौतिक निरीक्षण कराए, भारी वाहनों एवं कबाड़ की स्थिति, भवन-कक्षों की उपलब्धता, शिक्षक योग्यता तथा कक्षावार शिक्षण व्यवस्था की जांच करे और यदि अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई करे। क्योंकि सवाल सिर्फ एक स्कूल की व्यवस्था का नहीं, बल्कि उन मासूम बच्चों की सुरक्षा और भविष्य का है जिन्हें उनके अभिभावक भरोसे के साथ शिक्षा के लिए विद्यालय भेजते हैं।
