विभाग की नजर कमजोर या चश्मा धुंधला!
रेवांचल टाइम्स मंडला | घुघरी
तहसील मुख्यालय घुघरी में झोलाछाप डॉक्टरों का कारोबार इन दिनों मानो “स्वास्थ्य सेवा” नहीं बल्कि “खुला व्यवसाय” बन चुका है। गांव-गांव, गली-गली बिना मान्यता वाले कथित डॉक्टर इलाज, इंजेक्शन, ड्रिप और दवाइयों का पूरा पैकेज परोस रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है—या फिर शायद स्वास्थ्य विभाग ने आंखें बंद कर रखी हुई हैं!
स्थानीय लोगों का कहना है कि घुघरी से सलवाह और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कई कथित झोलाछाप क्लीनिक वर्षों से संचालित हैं। लेकिन कार्रवाई का हाल ऐसा है कि लगता है विभाग की गाड़ी केवल उन्हीं दरवाजों तक पहुंचती है, जहां “तालमेल” कमजोर हो। बाकी जगह सब “ऑल इज़ वेल” हैं!
अब जनता सवाल पूछ रही है—क्या कार्रवाई नियमों के आधार पर होती है या “सेटिंग” के हिसाब से? यदि अवैध इलाज अपराध है तो फिर कुछ पर डंडा और कुछ पर विभाग के द्वारा दुलार क्यों? कहीं ऐसा तो नहीं कि स्वास्थ्य विभाग का थर्मामीटर कुछ क्लीनिकों पर ही बुखार दिखाता है?
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर कार्रवाई का इंजेक्शन लगाकर अपनी जिम्मेदारी की ड्रिप चढ़ा देता है, लेकिन बीमारी जड़ से खत्म करने का इलाज अब तक नहीं मिला। सवाल यह भी है कि क्या विभाग को सभी अवैध क्लीनिक दिखाई नहीं देते, या फिर देखने की इच्छा ही नहीं है?
सबसे बड़ी बात तो यही है कि जिनके पास इलाज की वैध डिग्री नहीं, वे मरीजों का इलाज कैसे और क्यों कर रहे हैं; और जिनके पास कार्रवाई की वैध शक्ति है, वे जांच की फाइलों का इलाज कर रहे हैं।
अब क्षेत्र की जनता जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग कर रही है कि घुघरी, सलवाह और आसपास संचालित सभी कथित अवैध क्लीनिकों की निष्पक्ष संयुक्त जांच हो। ताकि यह साफ हो सके कि कानून सबके लिए बराबर है या फिर कुछ लोगों के लिए “विशेष छूट” अभी भी जारी है।
जनता का सीधा सवाल:
“साहब, कार्रवाई होगी सब पर… या फिर चलेगा वही पुराना खेल—सेटिंग है तो सेफ्टी है?”
