स्वास्थ्य समितियों में ‘हेल्थ फंड’ पर डाका-गांवों तक नहीं पहुंचा पैसा, हजम करने के आरोप

Revanchal
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दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला।मध्य प्रदेश के मंडला जिले में अब स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से जुड़ी ग्राम स्तरीय समितियों पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक ग्राम में गठित स्वास्थ्य समितियों को मिलने वाली सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।


सूत्रों के अनुसार, इन समितियों को ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने, साफ-सफाई, जागरूकता और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नियमित रूप से फंड दिया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गांवों में न तो स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई खास सुधार नजर आता है और न ही इन पैसों का कोई स्पष्ट उपयोग दिखाई देता है।


ग्रामीणों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि समिति के कुछ पदाधिकारी मिलकर इस राशि का बंदरबांट कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि पैसा जनहित में खर्च होने के बजाय “आपस में बांटने” तक सीमित रह गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरे मामले में न तो कोई भौतिक सत्यापन किया जा रहा है और न ही सार्वजनिक रूप से लेखा-जोखा पेश किया जा रहा है।


जनता का कहना है कि यदि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ही इस तरह की अनियमितताएं हो रही हैं, तो यह सीधे-सीधे ग्रामीणों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि प्रत्येक ग्राम की स्वास्थ्य समिति को मिलने वाली राशि की बारीकी से जांच कराई जाए, खर्च का ऑडिट किया जाए और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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