रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिले की तहसील मुख्यालय घुघरी में शासकीय भूमि एवं चरनोई भूमि पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण को लेकर क्षेत्र में गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो आने वाले वर्षों में स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, अस्पताल, खेल मैदान और अन्य शासकीय भवनों के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध नहीं बचेगी।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज भूमि पर धीरे-धीरे कब्जे होते गए, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या ग्राम पंचायत और राजस्व विभाग की लापरवाही या कथित मिलीभगत के कारण शासकीय संपत्तियों पर कब्जे बढ़ते गए?
उच्च शिक्षा के सपनों पर संकट
घुघरी आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र का प्रमुख तहसील मुख्यालय है। यहां आसपास के सैकड़ों गांवों के विद्यार्थी पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। लेकिन यदि भविष्य में कॉलेज, तकनीकी संस्थान, छात्रावास या अन्य शैक्षणिक भवनों की आवश्यकता पड़ती है तो उनके निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि कहां से उपलब्ध होगी?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में उच्च शिक्षा के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को मंडला, जबलपुर और अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है। यदि घुघरी में ही उच्च शिक्षा के संस्थान विकसित किए जाएं तो हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है, लेकिन भूमि की कमी विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बन सकती है।
चरनोई भूमि पर भी खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि चरनोई भूमि पर बढ़ते कब्जों के कारण पशुपालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शासन द्वारा संरक्षित भूमि का उद्देश्य सार्वजनिक हित और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करना होता है, लेकिन यदि इन भूमियों का संरक्षण नहीं हुआ तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
प्रशासन से उठ रहे सवाल
तहसील मुख्यालय घुघरी में कुल कितनी शासकीय भूमि उपलब्ध है?
कितनी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं?
कितने मामलों में राजस्व विभाग ने कार्रवाई की?
क्या भविष्य की शैक्षणिक एवं शासकीय परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित है?
अतिक्रमण रोकने के लिए ग्राम पंचायत और राजस्व विभाग ने क्या कदम उठाए?
जनहित में आवश्यक कार्रवाई
स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासन को शासकीय एवं चरनोई भूमि का सर्वे कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही जहां भी अवैध कब्जे पाए जाएं, वहां निष्पक्ष कार्रवाई कर भूमि को मुक्त कराया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित न हों।
वही घुघरी के नागरिक अब यह जानना चाहते हैं कि क्या उनके बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर भटकना पड़ेगा या फिर प्रशासन और जनप्रतिनिधि समय रहते भूमि बचाकर घुघरी को शिक्षा और विकास का केंद्र बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे। यह सवाल आज पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
