पशुपालन विभाग के कर्मचारियों पर गिरी गाज, लक्ष्य पूरे न होने पर कार्रवाई

Revanchal
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कृत्रिम गर्भाधान लक्ष्य में लापरवाही और सार्थक ऐप में उपस्थिति बनी बड़ी वजह डॉक्टर सहित अन्य कर्मचारियों को किया निलंबित

दैनिक रेवांचल टाइम्स –
पशुपालन विभाग में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर अब सख्ती शुरू हो गई है। विभागीय समीक्षा बैठक में गौ एवं भैंस वंश में कृत्रिम गर्भाधान के निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति नहीं होने पर कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। विभागीय स्तर पर हुई इस कार्रवाई के बाद कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।


जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा पशुधन विकास और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य तय किए गए थे, लेकिन कई क्षेत्रों में कर्मचारियों द्वारा लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं किया गया। समीक्षा बैठक में जब आंकड़ों की जांच हुई तो कई कर्मचारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई।


सार्थक ऐप में उपस्थिति भी बनी कार्रवाई का कारण
बताया जा रहा है कि सिर्फ लक्ष्य पूर्ति ही नहीं बल्कि “सार्थक ऐप” में कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और मॉनिटरिंग भी कार्रवाई की बड़ी वजह बनी। विभागीय अधिकारियों ने पाया कि कई कर्मचारी ऐप पर निर्धारित समय में उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे थे, जिससे कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।
सूत्रों के अनुसार विभाग अब फील्ड स्तर पर कर्मचारियों की गतिविधियों पर डिजिटल निगरानी बढ़ा रहा है और ऐप आधारित उपस्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है।
6 माह पहले इसी ऐप के विरोध में हुई थी हड़ताल
गौरतलब है कि लगभग छह माह पूर्व विभागीय कर्मचारियों ने इसी “सार्थक ऐप” को लेकर एक दिवसीय हड़ताल भी की थी। कर्मचारियों का कहना था कि तकनीकी समस्याओं और नेटवर्क बाधाओं के कारण ऐप के माध्यम से कार्य करना और उपस्थिति दर्ज करना कई क्षेत्रों में कठिन हो रहा है।
हालांकि विभाग ने उस समय कर्मचारियों की आपत्तियों को सुनने की बात कही थी, लेकिन अब उसी ऐप की मॉनिटरिंग के आधार पर कार्रवाई होने से कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही है।
प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव हुए सख्त
बताया जा रहा है कि विभागीय कार्यों में लगातार लापरवाही और लक्ष्य पूर्ति में कमी को लेकर प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने भी कड़ा रुख अपनाया है। विभागीय बैठकों में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि विभागीय सख्ती से कार्यप्रणाली में सुधार आता है या फिर कर्मचारियों और विभाग के बीच टकराव की स्थिति और बढ़ती है।

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