दैनिक रेवांचल टाईम्स – जबलपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय इन दिनों आम नागरिकों के लिए सुविधा केंद्र कम और परेशानी का सबसे बड़ा अड्डा ज्यादा बन चुका है। विभाग की लापरवाही, ऑनलाइन सिस्टम की खराब व्यवस्था और अधिकारियों की गैरमौजूदगी ने वाहन मालिकों और आवेदकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
स्थिति यह है कि यदि कोई व्यक्ति बिना दलालों और सिफारिश के ईमानदारी से अपना काम करवाना चाहता है, तो उसे परिवहन कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ताजा मामला वाहन संबंधी एनसीआर बी रिपोर्ट का सामने आया है, जहां परिवहन विभाग की ऑनलाइन साइट लगातार बंद बताई जा रही है। साइट ठप होने के कारण कई वाहनों की प्रक्रिया अधर में लटक गई है और आवेदक दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
इस मामले में अधिवक्ता धर्मेंद्र पटेल ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उन्होंने वाहन की फिटनेस सहित सभी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कर ली है, और उन्हें अपना वाहन जबलपुर से गुजरात लेकर जाना हैं जिसके लिए एन सी आर बी रिपोर्ट निकालने की बारी आई, परिवहन विभाग का पोर्टल बंद मिला।
उन्होंने कहा कि लगातार साइट बंद रहने से अब वाहन मालिकों के काम रुक चुके हैं और लोगों को मानसिक व आर्थिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब अधिवक्ता धर्मेंद्र पटेल इस समस्या को लेकर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रिंकू शर्मा से मिलने कार्यालय पहुंचे, लेकिन अधिकारी अपने कक्ष में मौजूद नहीं मिलीं।
इतना ही नहीं, दूसरी बार कार्यालय पहुंचने पर भी स्थिति वही रही। कर्मचारियों से पूछने पर सिर्फ इतना जवाब मिला कि “मैडम बाहर गई हैं।”
लगातार वरिष्ठ अधिकारी का कार्यालय से नदारद रहना अब विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आम लोगों का आरोप है कि जानबूझकर कामों को लंबित रखा जा रहा है, ताकि नागरिक परेशान होकर बिचौलियों का सहारा लेने को मजबूर हों।
परिवहन विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। एनसीआर रिपोर्ट नहीं मिलने से कई वाहनों के रजिस्ट्रेशन, फिटनेस और अन्य जरूरी कार्य अटक गए हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जब जनता घंटों लाइन में खड़ी होकर अपने काम के लिए संघर्ष कर रही है, तब जिम्मेदार अधिकारी कहां हैं? क्या आम नागरिकों को परेशान करना ही परिवहन विभाग की नई कार्यप्रणाली बन चुकी है?
लगातार सामने आ रही शिकायतों ने मध्य प्रदेश परिवहन विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो जनता का आक्रोश कभी भी बड़ा रूप ले सकता है।
