घटिया ईंटों से बन रहा सिझौरा पंचायत भवन…?तकनीकी निगरानी गायब, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

Revanchal
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— क्या शुरू होने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा पंचायत भवन…?

दैनिक रेवांचल टाईम्स –मंडला, सिझौरा/भुआ बिछिया।
सिझौरा में बन रहे नए पंचायत भवन का निर्माण कार्य अब सवालों के घेरे में आ गया है। ग्रामीण विकास और पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बनाए जा रहे इस सरकारी भवन में घटिया निर्माण सामग्री उपयोग किए जाने और तकनीकी निगरानी के अभाव के गंभीर आरोप सामने आए हैं।


स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भवन निर्माण में एस्टीमेट के अनुसार निर्धारित मजबूत और पक्की लाल ईंटों की जगह अधपक्की तथा कमजोर ईंटों का उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि कई ईंटें इतनी घटिया गुणवत्ता की हैं कि हल्का पानी लगते ही गलने और टूटने लगती हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस भवन की मजबूती कितने दिनों तक टिक पाएगी?


ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक निर्माण में यदि शुरुआत से ही गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, तो आने वाले समय में यह भवन ग्रामीणों के लिए सुविधा केंद्र कम और खतरा ज्यादा बन सकता है। सरकारी धन से बनने वाले भवनों में इस तरह की कथित लापरवाही सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की ओर इशारा करती नजर आ रही है।


सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि निर्माण कार्य के दौरान मौके पर न तो कोई जूनियर इंजीनियर नियमित रूप से मौजूद रहता है और न ही किसी तकनीकी सहायक की प्रभावी निगरानी दिखाई देती है। शासन के स्पष्ट नियम हैं कि प्रत्येक शासकीय निर्माण कार्य तकनीकी अधिकारियों की देखरेख में होना चाहिए, ताकि गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न हो। लेकिन सिझौरा पंचायत भवन निर्माण में नियमों को कथित रूप से ताक पर रखकर काम किए जाने के आरोप लग रहे हैं।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो पंचायत भवन बनने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा और भविष्य में इसकी मरम्मत के नाम पर फिर सरकारी धन की बर्बादी होगी। लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल निर्माण स्थल का निरीक्षण करें, उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराएं और दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों व निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करें।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि निर्माण कार्य में एस्टीमेट के अनुसार मानक गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग सुनिश्चित कराया जाए और तकनीकी अधिकारियों की नियमित उपस्थिति अनिवार्य की जाए, ताकि पंचायत भवन वास्तव में ग्रामीणों की जरूरतों के अनुरूप मजबूत और टिकाऊ बन सके।
इनका कहना है


“मुझे आपके द्वारा जानकारी मिली है। मैं जब तक मौके पर जाकर देख न लूं, तब तक कुछ नहीं कह सकती।”
— गीता आर्मो
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या फिर अन्य मामलों की तरह जांच और कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।

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