दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला इतना गंभीर है कि सवाल केवल एक जन्मदिन पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक अनुशासन और शासकीय व्यवस्था की साख का बन गया है।
वही सूत्रों के अनुसार मुख्य चिकित्सा अधिकारी डी.जे. मोहन्ती का जन्मदिन कार्यालय समय में पूरे स्टाफ के साथ धूमधाम से मनाया गया। सरकारी दफ्तर का नजारा ऐसा था मानो कोई निजी होटल, क्लब या रेस्टोरेंट हो। कर्मचारी फाइलों और जनता के काम छोड़कर जश्न में व्यस्त दिखाई दिए, जबकि दूर-दराज से पहुंचे ग्रामीण और जरूरतमंद लोग घंटों कार्यालयों के चक्कर काटते रहे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए हैं या अधिकारियों की निजी पार्टियों के लिए? जिस स्वास्थ्य विभाग पर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी है, वहीं का मुख्य कार्यालय यदि कामकाज छोड़कर “उत्सव केंद्र” बन जाए, तो फिर आम जनता न्याय और सुविधा की उम्मीद किससे करे?
यह घटना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सिविल सेवा आचरण नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने जैसी नजर आ रही है। जब विभाग का मुखिया ही सरकारी समय और कार्यालय की गरिमा का मजाक बनाएगा, तो अधीनस्थ अधिकारी-कर्मचारियों पर उसका क्या असर पड़ेगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 13 मार्च 2023 को भी इसी कार्यालय का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था, जिसमें आरोप लगे थे कि शाम होते ही कार्यालय “मयखाना” बन जाता है और मांस-मदिरा के साथ जाम छलकाए जाते हैं। उस समय भी मामला चर्चा में रहा, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति और आश्वासन दिए गए। आज तक न जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, न किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई सामने आई।
अब जनता पूछ रही है —
क्या सरकारी कार्यालयों में जन्मदिन और निजी पार्टियां मनाना नियमों के तहत वैध है?
कार्यालय समय में कामकाज ठप्प होने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या स्वास्थ्य विभाग में अनुशासन केवल छोटे कर्मचारियों के लिए है? आखिर पूर्व वायरल मामलों की जांच रिपोर्ट, सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?
विडंबना यह है कि एक तरफ आम जनता अस्पतालों में डॉक्टर, दवा और सुविधाओं के लिए भटकती है, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार विभागीय कार्यालयों में जश्न और दिखावे की संस्कृति हावी होती जा रही है। यदि समय रहते प्रशासन ने इस तरह की कार्यशैली पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो यह संदेश जाएगा कि मंडला जिले में सरकारी कार्यालय जवाबदेही से नहीं, बल्कि मनमानी और संरक्षण की संस्कृति से संचालित हो रहे हैं।
