आदिवासियों के नाम पर “आदि उत्सव” में राजनीति का प्रदर्शन, गर्मी में बेहाल जनता और एसी में बैठे नेता

Revanchal
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मण्डला से सवाल — क्या आदिवासी संस्कृति सिर्फ राजनीतिक मंच सजाने का माध्यम बनकर रह गई है?

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मण्डला।
जिले के ऐतिहासिक रामनगर किले में आयोजित “आदि उत्सव” इस बार आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से ज्यादा राजनीतिक रंग में रंगा नजर आया। करोड़ों रुपये के सरकारी बजट से आयोजित इस कार्यक्रम में जहां आम जनता भीषण गर्मी और गर्म लपटों के बीच परेशान होती रही, वहीं मंच और महल के अंदर नेताओं एवं अधिकारियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं चर्चा का विषय बनी रहीं।
करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपये के बजट वाले इस आयोजन में आदिवासी समाज की संस्कृति को बढ़ावा देने का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही तस्वीर बयां करते दिखे। कार्यक्रम स्थल पर सरकारी कर्मचारियों की भीड़ अधिक दिखाई दी, जबकि आम ग्रामीण और आदिवासी परिवार अव्यवस्थाओं से जूझते नजर आए।
“आदि उत्सव” में दिखा राजनीतिक वर्चस्व
पूरा आयोजन भाजपा नेताओं के प्रभाव में दिखाई दिया। मंच पर ज्यादातर कुर्सियां भाजपा नेताओं और सत्ता से जुड़े लोगों के कब्जे में रहीं। हैरानी की बात यह रही कि जनता द्वारा चुने गए कई जनप्रतिनिधियों को मंच पर स्थान तक नहीं मिला।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आदिवासी संस्कृति के नाम पर आयोजित कार्यक्रम को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया गया। मंच से लेकर व्यवस्थाओं तक हर जगह राजनीतिक प्रभाव साफ दिखाई दिया।
गर्मी में तड़पती जनता, एसी में आराम करते नेता
एक ओर तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच आम लोग घंटों बैठे रहे, वहीं दूसरी ओर महल के भीतर नेताओं और अधिकारियों के लिए विशेष डायनिंग व्यवस्था और ठंडी हवा की सुविधाएं मौजूद थीं।
कार्यक्रम में पहुंचे कई ग्रामीणों ने बताया कि पीने के पानी, छांव और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं थी। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे गर्मी से परेशान दिखाई दिए, लेकिन जिम्मेदार लोगों का ध्यान वीआईपी व्यवस्थाओं पर ज्यादा केंद्रित रहा।
खाने के लिए भटकते रहे लोग, टोकन के नाम पर वसूली के आरोप
आदि उत्सव में भोजन व्यवस्था को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने आरोप लगाया कि खाने के लिए टोकन के नाम पर रुपये मांगे जा रहे थे।
लोग भोजन पाने के लिए इधर-उधर भटकते रहे, जबकि वीआईपी क्षेत्र में नेताओं और अधिकारियों के लिए अलग से विशेष भोजन व्यवस्था की गई थी। इससे आम जनता में भारी असंतोष देखने को मिला।
धरोहर पर खतरा, संरक्षण की जगह दिखावा
रामनगर का ऐतिहासिक महल और उसकी धरोहरें पहले ही उपेक्षा का शिकार हैं। अब भारी भीड़, अव्यवस्थित आयोजन और राजनीतिक प्रदर्शन के कारण ऐतिहासिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इसी तरह बिना संरक्षण और जिम्मेदारी के आयोजन होते रहे तो रामनगर की यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो जाएगी।
आदिवासी संस्कृति के नाम पर सवालों के घेरे में आयोजन
जिस आयोजन का उद्देश्य आदिवासी कला, संस्कृति और परंपराओं को सम्मान देना था, वही आयोजन अब राजनीतिक प्रचार, वीआईपी संस्कृति और अव्यवस्थाओं के कारण सवालों के घेरे में आ गया है।
लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं, तो आखिर यह उत्सव किसके लिए आयोजित किया गया था — आदिवासियों के लिए या नेताओं के प्रदर्शन के लिए?

बॉक्स
महल के अंदर “राजा-महाराजाओं” जैसी व्यवस्था, बाहर गर्मी में परेशान रही जनता
एक ओर आदि उत्सव में शामिल आम लोग भीषण गर्मी, धूप और अव्यवस्थाओं से जूझते रहे, वहीं दूसरी ओर रामनगर महल के अंदर नेताओं और अधिकारियों के लिए विशेष शाही इंतजाम किए गए थे।
सूत्रों के अनुसार महल के भीतर अलग से डायनिंग टेबल सजाई गई थी, जहां जिले के वरिष्ठ अधिकारी, कलेक्टर, एसपी और नेता ठंडी व्यवस्था के बीच भोजन का आनंद लेते नजर आए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आदिवासी संस्कृति के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में नेताओं और अधिकारियों ने मानो “राजा-महाराजाओं” जैसी जीवनशैली का प्रदर्शन किया, जबकि बाहर आम जनता पानी, छांव और भोजन जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होती रही।
इस विरोधाभासी तस्वीर ने आयोजन की मंशा और सरकारी खर्चों पर कई सवाल खड़े कर दिए!

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