बीजाडांडी में गांव-गांव बिक रही अवैध शराब, किराना दुकानों और पान टपरों तक पहुंचा नेटवर्क

Revanchal
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संरक्षण के बिना संभव नहीं इतना बड़ा कारोबार, पुलिस-आबकारी की भूमिका पर उठ रहे सवाल

रेवांचल टाइम्स, बीजाडांडी मंडला
बीजाडांडी क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार अब इस कदर फैल चुका है कि गांव-गांव इसकी जड़ें जम गई हैं।सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार हालात यह हैं कि किराना दुकानों, पान टपरों और छोटे-छोटे ठिकानों पर खुलेआम देशी और विदेशी शराब बेची जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह धंधा बिना किसी संरक्षण के चल ही नहीं सकता। पुलिस और आबकारी विभाग सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं, जिसके चलते शराब माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।


बीजाडांडी विकासखंड के लगभग 142 गांवों में से करीब 10 से 15 गांव ऐसे बताए जा रहे हैं जहां अंग्रेजी और विदेशी शराब की खुलेआम सप्लाई की जा रही है। आरोप है कि लाइसेंसी ठेकेदारों के लोग खुद गांवों तक शराब पहुंचा रहे हैं। बाइक और चारपहिया वाहनों से सुबह से लेकर देर शाम तक शराब की खेप गांवों में उतारी जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई छिपा हुआ कारोबार नहीं बल्कि खुलेआम चल रहा गोरखधंधा है, जिसे देखने वाला हर व्यक्ति जानता है, लेकिन कार्रवाई करने वाले विभाग अनजान बने हुए हैं।


गांवों के किराना दुकानों और पान टपरों में हर ब्रांड की शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है। ग्राहक यदि किसी विशेष ब्रांड की मांग करता है तो उसे भी उपलब्ध करा दिया जाता है। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध कारोबार पूरी तरह संगठित तरीके से संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शराब माफियाओं ने सिस्टम को पूरी तरह “सेट” कर रखा है।

यही कारण है कि पुलिस और आबकारी विभाग कभी-कभार छोटी-मोटी कार्रवाई कर सिर्फ खानापूर्ति कर देते हैं, लेकिन असली सप्लायर और बड़े कारोबारी आज तक पकड़ में नहीं आए।


बीजाडांडी क्षेत्र में कच्ची महुआ शराब का कारोबार भी तेजी से फैल रहा है। गली-मोहल्लों और गांवों में बिना किसी मानक के शराब तैयार कर बेची जा रही है। यह शराब लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण यह धंधा बेरोकटोक जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा हुआ।


सबसे बड़ा सवाल बीजाडांडी पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। क्षेत्र में हर कोई जानता है कि कौन शराब सप्लाई कर रहा है, कौन वाहन से खेप पहुंचा रहा है और किन दुकानों से शराब बेची जा रही है, लेकिन पुलिस के हाथ आज तक किसी बड़े आरोपी तक नहीं पहुंचे। लोगों का आरोप है कि पुलिस की मौन सहमति के बिना इतना बड़ा नेटवर्क संचालित होना संभव नहीं है। शराब सप्लाई करने वाले युवक दिनभर गांवों में घूमते हैं, लेकिन कभी उनकी बाइक या गाड़ियों की जांच नहीं होती। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि कहीं न कहीं संरक्षण जरूर प्राप्त है।


आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सूत्र बताते हैं कि विभाग की टीम शायद ही कभी गांवों में पहुंचती हो। विभाग केवल अपने राजस्व और टारगेट पूरे करने में लगा रहता है। शराब की बड़ी खेप पकड़ने या मुख्य सप्लायरों तक पहुंचने के बजाय छोटे गरीब लोगों पर कार्रवाई कर विभाग अपनी पीठ थपथपाने में जुटा रहता है। चार-पांच पाव शराब जब्त कर फोटो खिंचवाने और प्रेस नोट जारी करने तक ही कार्रवाई सीमित दिखाई देती है।


ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब के कारण क्षेत्र का सामाजिक माहौल लगातार बिगड़ रहा है। शराब की लत ने कई परिवारों को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। आए दिन घरेलू विवाद, मारपीट और आर्थिक तंगी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। युवा पीढ़ी तेजी से नशे की गिरफ्त में जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों को इसकी कोई चिंता नहीं दिखाई दे रही।


लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर हो तो इस अवैध कारोबार पर कुछ ही दिनों में लगाम लग सकती है। गांवों में लगातार निगरानी, सप्लाई चेन पर कार्रवाई और बड़े माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है और जमीनी स्तर पर शराब माफियाओं का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है।


अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजाडांडी में फल-फूल रहे इस अवैध शराब कारोबार पर कभी लगाम लग पाएगी, या फिर संरक्षण की छांव में यह गांव-गांव तक यूं ही पहुंचता रहेगा। जनता जवाब चाहती है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

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