बच्चों के भावनात्मक पत्रों ने बदली सोच, पालकों ने लिया तंबाकू छोड़ने का संकल्प

Revanchal
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विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर शिक्षक नवीन चौरसिया की अनूठी पहल बनी प्रेरणा, गांव में छिड़ी नशामुक्ति की नई मुहिम

रेवांचल टाइम्स बिनैका मंडला विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिनैका में एक अनूठी और भावनात्मक पहल देखने को मिली, जिसने न केवल लोगों का ध्यान आकर्षित किया बल्कि कई परिवारों की सोच बदलने का भी काम किया। विद्यालय के शिक्षक नवीन चौरसिया द्वारा शुरू किए गए इस अभिनव अभियान में विद्यार्थियों ने अपने पिता, भाई और अन्य परिजनों के नाम भावनात्मक पत्र लिखकर तंबाकू और नशे से दूर रहने की अपील की। बच्चों की मासूम भावनाओं से भरे इन पत्रों का ऐसा असर हुआ कि कई पालकों ने सार्वजनिक रूप से तंबाकू त्यागने का संकल्प ले लिया।


शिक्षक नवीन चौरसिया के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने अपने मन की बात कागज पर उतारी। पत्रों में बच्चों ने तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए अपने प्रियजनों से स्वस्थ जीवन अपनाने का आग्रह किया। बच्चों ने बेहद सरल लेकिन मार्मिक शब्दों में लिखा कि वे अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को स्वस्थ और सुरक्षित देखना चाहते हैं तथा उन्हें किसी भी बीमारी का शिकार होते नहीं देख सकते।


इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि शिक्षक नवीन चौरसिया स्वयं विद्यार्थियों के साथ गांव के विभिन्न घरों तक पहुंचे और ये पत्र पालकों को सौंपे। जब अभिभावकों ने अपने बच्चों द्वारा लिखे गए पत्र पढ़े तो कई लोग भावुक हो गए। बच्चों की चिंता, प्रेम और संवेदनाओं से भरे शब्दों ने सीधे उनके दिल को छू लिया। कई पालकों ने वहीं तंबाकू और अन्य नशे की आदत छोड़ने का संकल्प लिया तथा अपने बच्चों को बेहतर और स्वस्थ भविष्य देने का वादा किया।


विद्यार्थियों ने अपने पत्रों में यह भी लिखा कि वे अक्सर अपने परिजनों से नशा छोड़ने की बात सीधे कहने में संकोच महसूस करते हैं। इसलिए उन्होंने पत्र के माध्यम से अपनी चिंता और भावनाएं व्यक्त कीं। पत्रों में मुख कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख करते हुए बताया गया कि तंबाकू केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करता है।


गांव में इन दिनों बच्चों द्वारा लिखे गए ये पत्र चर्चा का प्रमुख विषय बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जागरूकता अभियान जहां कई बार लोगों तक सीमित प्रभाव छोड़ते हैं, वहीं बच्चों की भावनाओं से निकला यह संदेश लोगों के हृदय तक पहुंचा है। ग्रामीणों ने इसे सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक अत्यंत प्रभावी और प्रेरणादायक पहल बताया है।


पालकों ने शिक्षक नवीन चौरसिया की इस सोच की मुक्त कंठ से सराहना की। उनका कहना है कि बच्चों के माध्यम से दिया गया संदेश किसी भी उपदेश से अधिक प्रभावशाली साबित हुआ है। कई अभिभावकों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से तंबाकू का सेवन कर रहे थे, लेकिन बच्चों के पत्र पढ़ने के बाद उन्हें अपनी जिम्मेदारी का एहसास हुआ और उन्होंने नशा छोड़ने का निर्णय लिया।


विद्यालय परिवार ने भी इस पहल को जनजागरूकता का प्रभावी माध्यम बताया है। विद्यालय के प्राचार्य ए.के. जैन सहित मणिकांत पटेल, संतोष रघुवंशी, राकेश सोनी, गोपाल सोनी, मदन धूमकेती, सुरेंद्र बरया एवं संजय तिवारी ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ऐसे प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की भावनाओं से जुड़ा यह अभियान तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर शुरू हुई यह पहल अब केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे क्षेत्र में जनजागरूकता का संदेश बन गई है। बच्चों के स्नेह और चिंता से भरे इन पत्रों ने यह साबित कर दिया कि यदि संदेश दिल से निकले तो वह समाज में बड़ा बदलाव लाने की ताकत रखता है। शिक्षक नवीन चौरसिया और विद्यार्थियों का यह प्रयास आज क्षेत्र में प्रेरणा का विषय बना हुआ है और नशामुक्त समाज की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

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