मुर्दों के रास्ते पर भी नजर! भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कैसे?

Revanchal
3 Min Read

शासकीय मार्ग को निजी भूमि बताकर विक्रय करने का आरोप, पटवारी-तहसीलदार की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

जनसुनवाई में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

दैनिक रेवांचल टाइम्स सिवनी- ग्राम अमोली, तहसील धनोरा, जिला सिवनी के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि गांव के सार्वजनिक उपयोग के रास्ते एवं शासकीय मद की भूमि को निजी भूमि में शामिल कर उसका नामांतरण कर दिया गया तथा बाद में विक्रय भी कर दिया गया। शिकायत सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।

मुर्दों का रास्ता भी नहीं छोड़ा!

ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि को निजी स्वामित्व में दर्शाया गया है, वह वर्षों से गांव के लोगों के आवागमन तथा अंतिम संस्कार के लिए शवों को श्मशान घाट तक ले जाने के रास्ते के रूप में उपयोग होती रही है। अब लोगों को आशंका है कि यदि यह रास्ता निजी हो गया तो भविष्य में ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

सरकारी रिकॉर्ड में रास्ता, फिर निजी कैसे हो गया?

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि राजस्व अभिलेखों और पूर्व में प्रस्तुत प्रतिवेदन में संबंधित भूमि को शासकीय मार्ग बताया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किस प्रक्रिया और किसके आदेश से यह भूमि निजी खाते में दर्ज हो गई।

कलेक्टर के आदेश बिना शासकीय जमीन निजी नहीं हो सकती

राजस्व मामलों के जानकारों के अनुसार शासकीय भूमि का स्वरूप बदलना सामान्य प्रक्रिया नहीं है। ऐसी भूमि को निजी खाते में दर्ज करने के लिए सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति आवश्यक होती है। यदि संबंधित भूमि वास्तव में शासकीय मार्ग थी तो क्या इसके लिए कलेक्टर स्तर से कोई आदेश जारी हुआ था? यदि नहीं, तो फिर शासकीय भूमि निजी नाम पर चढ़ी कैसे और उसका विक्रय किस आधार पर कर दिया गया?

पटवारी की कलम चली या सिस्टम में बैठा कोई बड़ा खिलाड़ी?

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि भूमि शासकीय थी तो पटवारी ने बिक्री से संबंधित दस्तावेज तैयार कैसे कर दिए और तहसीलदार ने संबंधित प्रक्रिया को स्वीकृति कैसे प्रदान कर दी? लोगों का कहना है कि बिना राजस्व अमले की भूमिका के ऐसा संभव नहीं है।

जांच हुई तो कई चेहरों से उतर सकता है नकाब

ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि शासकीय भूमि को नियम विरुद्ध निजी नाम पर चढ़ाया गया है तो दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं लाभ लेने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अब पूरे मामले में प्रशासन की जांच पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

क्रमशः…

कल पढ़िए : “जीवित को मृत बता चुका राजस्व विभाग, अब सरकारी रास्ते पर सवाल!”

👁️ 1 views Views
Share This Article
Translate »