पंचायत दर्पण पोर्टल बना भ्रष्टाचार छुपाने का माध्यम? जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला
आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में विकास के नाम पर ग्राम पंचायतों में हो रहे खर्चों की पारदर्शिता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार द्वारा शुरू किया गया पंचायत दर्पण पोर्टल जहां ग्रामीण विकास कार्यों की निगरानी और भुगतान प्रक्रिया को ऑनलाइन पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, वहीं अब यही पोर्टल कई पंचायतों में गड़बड़ियों को छुपाने का जरिया बनता नजर आ रहा है।

धुंधले बिलों से लाखों का आहरणजनपद पंचायत नैनपुर की समनापुर ग्राम पंचायत में पिछले लगभग दो वर्षों में निर्माण कार्यों के नाम पर बड़ी संख्या में ऐसे बिल अपलोड किए गए हैं जो पूरी तरह धुंधले और अस्पष्ट हैं। इन बिलों में न तो सामग्री का नाम स्पष्ट दिखाई देता है, न मात्रा और न ही भुगतान की गई राशि।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिल पढ़े ही नहीं जा सकते तो उनके आधार पर भुगतान कैसे कर दिया गया?
दूसरी पंचायतों में साफ बिल, फिर यहां ही गड़बड़ी क्यों?नैनपुर जनपद की अन्य पंचायतों में अपलोड बिल स्पष्ट और पठनीय हैं, जिससे यह साफ होता है कि पोर्टल या ऐप में कोई तकनीकी खामी नहीं है।ऐसे में समनापुर पंचायत में ही भारी संख्या में धुंधले बिल अपलोड होना सीधे तौर पर प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
जिम्मेदार कौन – सरपंच-सचिव या अधिकारी?नियमों के अनुसार बिलों की निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी जनपद स्तर पर होती है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल पर अपलोड और भुगतान की पूरी प्रक्रिया सरपंच-सचिव के स्तर से होती है और शिकायत मिलने पर ही जांच की जाती है।यहां बड़ा प्रश्न यह है कि — बिना जांच लाखों का भुगतान कैसे हो गया?मॉनिटरिंग सिस्टम क्या केवल कागजों में ही है?पारदर्शिता पर बड़ा सवालजिस ऑनलाइन व्यवस्था को भ्रष्टाचार रोकने के लिए लागू किया गया था, उसी का उपयोग यदि जानकारी छुपाने के लिए किया जा रहा है तो यह पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह है।जांच और कार्रवाई की मांगअब जरूरत है कि —समनापुर पंचायत के सभी धुंधले बिलों की तकनीकी और वित्तीय जांच होसंबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाएअपठनीय बिलों पर हुए भुगतान की रिकवरी की जाएजनता का सीधा सवालक्या पारदर्शिता सिर्फ पोर्टल तक सीमित है?या फिर जमीनी स्तर पर भी जवाबदेही तय होगी?
