दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक दावों की पोल लगातार खुलती नजर आ रही है। ताजा मामला नैनपुर तहसील के ग्राम परसवाड़ा का है, जहां बरसात से पहले एक सरकारी तालाब को कथित रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। आरोप है कि निवारी नैनपुर निवासी रोहित ठाकुर ने तालाब की पाल (बंध) को तोड़ दिया, जिसके कारण पहली ही तेज बारिश में तालाब का बड़ा हिस्सा बह गया और सरकारी जल संरचना को भारी नुकसान पहुंचा।
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब केवल जल संग्रहण का साधन नहीं था, बल्कि आसपास के किसानों, मवेशियों और भू-जल संरक्षण का महत्वपूर्ण स्रोत भी था। तालाब की पाल टूटने से न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा बल्कि भविष्य में जल संकट की आशंका भी गहरा गई है।
मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच और कार्रवाई करने के बजाय नायब तहसीलदार तथा संबंधित राजस्व निरीक्षक ने शिकायत वापस कराने का दबाव बनाया। शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही तालाब की मरम्मत कराकर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी, इसलिए शिकायत बंद करा दी गई।
लेकिन समय बीतने के बाद भी न तो तालाब की मरम्मत हुई और न ही कथित दोषी के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की गई। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती तो आज तालाब की यह स्थिति नहीं होती।
अब शिकायतकर्ता ने दोबारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, शिकायत बंद कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच हो, सरकारी तालाब की तत्काल मरम्मत कराई जाए तथा तालाब को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति के खिलाफ राजस्व एवं अन्य संबंधित कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी जल संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी और शिकायतों को केवल कागजों में बंद कराया जाता रहेगा, तो सरकारी संपत्तियों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले में पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है।
