सीएम हेल्पलाइन में ‘गोलमाल सिस्टम’ हावी?

Revanchal
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समाधान के नाम पर दिखावा, शिकायतकर्ता परेशान — ओटीपी लेकर बंद हो रहीं शिकायतें


दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।
जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू की गई CM Helpline 181 अब मंडला जिले में सवालों के घेरे में नजर आने लगी है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिस व्यवस्था से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब उनके लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है।


लोगों का कहना है कि जिन विभागों के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाती है, वही विभाग के अधिकारी शिकायतकर्ताओं को बुलाकर या फोन कर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाते हैं। कई मामलों में शिकायतकर्ताओं को धमकाने तक की बातें सामने आ रही हैं। ऐसे हालात में सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ गया है।


ओटीपी लेकर बंद कर दी जाती हैं शिकायतें


स्थानीय सूत्रों और शिकायतकर्ताओं के अनुसार कई विभागों में समस्या का वास्तविक समाधान करने की बजाय नया “गोलमाल सिस्टम” चल रहा है। आरोप है कि अधिकारी-कर्मचारी शिकायतकर्ता को फोन कर यह कहते हैं कि “अगली बार आपकी समस्या जरूर हल कर दी जाएगी”, और इसी बहाने उनसे शिकायत बंद करने के लिए भेजा गया ओटीपी मांग लेते हैं।


इसके बाद उसी ओटीपी का उपयोग कर शिकायत को “समाधान” दिखाकर बंद कर दिया जाता है। परिणाम यह होता है कि कागजों में शिकायत का निराकरण दिख जाता है, लेकिन जमीन पर समस्या जस की तस बनी रहती है।


राजस्व विभाग नैनपुर पर सबसे ज्यादा सवाल


जानकारी के अनुसार मंडला जिले के राजस्व विभाग, नैनपुर क्षेत्र में इस तरह की शिकायतें सबसे ज्यादा सामने आ रही हैं। यहां लोगों का आरोप है कि वास्तविक समाधान की बजाय केवल आंकड़े सुधारने का खेल चल रहा है।


साल भर की शिकायतों की जांच हो तो खुलेंगे राज


नागरिकों का कहना है कि यदि वर्ष 2025 में दर्ज सभी शिकायतों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो सच्चाई खुद सामने आ जाएगी। आरोप है कि बड़ी संख्या में शिकायतें बिना समाधान के ही बंद कर दी गईं, जिससे विभाग कागजों में बेहतर प्रदर्शन दिखा सके।


जनता के सवाल


क्या सीएम हेल्पलाइन सिर्फ आंकड़े सुधारने का माध्यम बनकर रह गई है?
जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो शिकायतें बंद कैसे हो रही हैं?
क्या जिला प्रशासन को इस पूरे खेल की जानकारी नहीं है?


उच्च स्तरीय जांच की मांग


लगातार बढ़ते जनआक्रोश के बीच नागरिकों ने मांग उठाई है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, सभी शिकायतों का जमीनी सत्यापन कराया जाए और जिन अधिकारियों-कर्मचारियों ने फर्जी तरीके से शिकायतें बंद की हैं, उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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