
नरसिंहपुर, 30 मई 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रेलवे हॉस्पिटल नरसिंहपुर में पर्यावरण संरक्षण, जल बचत एवं ऊर्जा संरक्षण विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अस्पताल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
इस अवसर पर रेलवे चिकित्सक डॉ. आर.आर. कुर्रे ने जल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि पानी जीवन का आधार है और इसकी प्रत्येक बूंद अमूल्य है। उन्होंने बताया कि अक्सर सार्वजनिक स्थानों पर लोग नलों को खुला छोड़ देते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता है। ऐसी आदतों में सुधार कर हम जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
डॉ. कुर्रे ने कहा कि पौधों की सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम का उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे कम पानी में अधिक सिंचाई संभव होती है। किसानों को भी खेती में आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई। उन्होंने लोगों से अपील की कि वाहन धोने के लिए पाइप की बजाय बाल्टी का उपयोग करें तथा आवश्यकता के अनुसार ही पानी लें और उसका दुरुपयोग न करें।
उन्होंने बताया कि विवाह एवं सामाजिक आयोजनों में अक्सर लोग पूरा गिलास पानी लेकर उसे अधूरा छोड़ देते हैं, जिससे पानी की अनावश्यक बर्बादी होती है। ऐसे आयोजनों में भी जल संरक्षण के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में वर्षा जल संचयन पर भी विशेष जोर दिया गया। डॉ. कुर्रे ने कहा कि वर्षा के पानी को तालाबों, पोखरों एवं जल संरचनाओं में संग्रहित किया जाए, जिससे भू-जल स्तर बनाए रखने में सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि जंगलों और पेड़-पौधों का संरक्षण भी जल चक्र को संतुलित बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। साथ ही जीव-जंतुओं के जीवन के लिए भी पानी का संरक्षण जरूरी है।
ऊर्जा संरक्षण के विषय में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता न हो वहां लाइट, पंखे एवं अन्य विद्युत उपकरणों को बंद रखना चाहिए। कई स्थानों पर दिन के समय भी स्ट्रीट लाइटें जलती रहती हैं, जिस पर संबंधित कर्मचारियों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इससे बिजली की काफी बचत की जा सकती है।
डॉ. कुर्रे ने सौर ऊर्जा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह स्वच्छ, पर्यावरण अनुकूल और दीर्घकालिक ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है। अधिक से अधिक स्थानों पर सोलर पैनल एवं सौर ऊर्जा आधारित उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जल एवं ऊर्जा संरक्षण के लिए जागरूक रहने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। जल और ऊर्जा की बचत कर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित कर सकते हैं।
