​छिंदवाड़ा जेल कांड महानिदेशक (जेल) भोपाल से जिला जेल अधीक्षक को सस्पेंड करने की मांग

Revanchal
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​मानव अंग तस्करी के संदिग्धों को जेल में वी.आई.पी. ट्रीटमेंट देने पर समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने खोला मोर्चा

आर.टी.आई. में हुआ बड़ा खुलासा
25 वर्षों से अवैध रूप से संचालित हो रही थी संस्था, जांच को प्रभावित करने के लिए जेल में रची जा रही साजिश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, मुख्यमंत्री, जिला सत्र न्यायालय, कलेक्टर तक पहुंची शिकायत

रेवांचल टाइम्स ​छिंदवाड़ा

छिंदवाड़ा जिला जेल में सुरक्षा व्यवस्था और जेल नियमों की धज्ज़ियां उड़ाने का एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। जिले के प्रसिद्ध समाजसेवी चौरसिया ने महानिदेशक (जेल) भोपाल, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग दिल्ली, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जेल विभाग (मंत्रालय), जिला एवं सत्र न्यायाधीश छिंदवाड़ा तथा जिला कलेक्टर छिंदवाड़ा को स्पीड पोस्ट के माध्यम से लिखित शिकायत भेजकर जिला जेल अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जेल प्रशासन ने मिलीभगत कर संगीन अपराधों के आरोपियों और मानव अंग तस्करी जैसे जघन्य मामलों के संदिग्धों को जेल के भीतर न केवल अवैध रूप से प्रवेश दिया, बल्कि उन्हें वी.आई.पी. सुलभता’ भी प्रदान की।

​समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया द्वारा सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार
​गंभीर धाराओं में दर्ज है एफ.आई.आर.: थाना परासिया में दर्ज अपराध क्रमांक 12/2025 के तहत लायंस क्लब, लायंस आई हॉस्पिटल परासिया के 7 पदाधिकारियों हरिशंकर साहू, पूरन राजलानी, पिंकेश पटोरीया, अनिल जैन, आलोक जैन, जगजीत बिल्लू मान, एवं कन्हैया राजलानी के विरुद्ध धारा 420, 409, 34 के तहत गंभीर धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला दर्ज है। राष्ट्रीय अंधत्वमुक्त निवारण मिशन भारत सरकार के फंड में गबन एवं धोखाधड़ी के चलते मध्य प्रदेश सरकार ने यह एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है।

​आर.टी.आई. में हुआ चौंकाने वाला खुलासा संस्था गैर-पंजीकृत

समाजसेवी चौरसिया द्वारा सूचना के अधिकार के तहत निकाली गई आधिकारिक जानकारी से यह स्तब्ध करने वाला सच सामने आया है कि यह संस्था न तो जिला स्तर पर, न प्रदेश स्तर पर और न ही केंद्र सरकार से पंजीकृत है। लिखित आरटीआई के अनुसार, इस संस्था के पास आंख निकालने (नेत्र संकलन) और आंख प्रत्यारोपण कॉर्नियल ट्रांसप्लांट करने का कोई भी वैधानिक पंजीयन या कानूनी अधिकार नहीं है। इसके बावजूद यह संस्था पिछले 25 वर्षों से जिले में अवैध रूप से नेत्रदान का काम कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय ​मानव अंग तस्करी जैसे जघन्य आरोप
उक्त आरोपियों और उनकी इस गैर-पंजीकृत संस्था पर अवैध रूप से नेत्र निकालने, नेत्र प्रत्यारोपण और मानव अंग तस्करी जैसे देश को दहला देने वाले संगीन आरोप हैं। इस अति महत्वपूर्ण मामले का संज्ञान स्वयं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया है, जिसके बाद वर्तमान में मध्य प्रदेश शासन के स्वास्थ्य आयुक्त के दिशा-निर्देश पर मेडिकल डीन कार्यालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रहा है।

परासिया कोल्ड ड्रिंक कांड के बंदियों से साठगांठ व जांच प्रभावित करने की साजिश

बहुचर्चित ‘परासिया कोल्ड ड्रिंफ़ कांड’ जिसमें 25 मासूम बच्चों की असमय मृत्यु हुई थी के आरोपी तीन मुख्य चिकित्सक—डॉ. प्रवीण सोनी पत्नी सहित, डॉ. एस.एस. ठाकुर, और डॉ. अमन सिद्दीकी सहित कुछ मेडिकल संचालक वर्तमान में छिंदवाड़ा जेल में निरुद्ध हैं। आरोप है कि जेल में बंद डॉ. प्रवीण सोनी का सगा साला प्रदीप सोनी, लायंस क्लब के इन गंभीर आरोपियों को लेकर जेल के भीतर दाखिल हुआ था। वर्तमान में चल रही SIT की निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने और साक्ष्यों को दबाने के उद्देश्य से जेल के भीतर इस प्रकार की संदिग्ध गतिविधियां और बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिसमें निश्चित ही जिला जेल अधीक्षक की पूरी मिलीभगत है।

​जेल मैनुअल का खुला उल्लंघन और VIP ट्रीटमेंट

इतने संवेदनशील और संगीन मामलों के संदिग्धों को जिला जेल अधीक्षक द्वारा जेल के भीतर न केवल आसानी से प्रवेश दिया गया, बल्कि कैदियों को सकारात्मक मोटिवेशन देने के नाम पर बाकायदा मंच और खुली छूट प्रदान की गई। जेल जैसे उच्च सुरक्षा वाले अति-संवेदनशील क्षेत्र में ऐसे अपराधियों को यह स्वतंत्रता देना जेल मैनुअल का खुला उल्लंघन है और यह
अधिकारियों की बड़ी साठगांठ की ओर साफ इशारा करता है।

​समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया की मुख्य मांगें
​तत्काल निलंबन गंभीर अभियुक्तों और संदिग्धों को जेल के भीतर अवैध/ वी.आई.पी. एंट्री व अनुचित लाभ देने के दोषी जिला जेल अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।

​उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच: यह आरोपी जेल के भीतर किस दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य, प्रभाव या साठगांठ के तहत पहुंचे और जांच को प्रभावित करने का क्या षड्यंत्र रचा जा रहा था, इसकी निष्पक्ष जांच हो ताकि जेल की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की शुचिता बनी रहे।

चौरसिया का बड़ा बयान आर.टी.आई. से यह साफ हो चुका है कि यह संस्था पूरी तरह अवैध है। वर्तमान में चल रही एसआईटी की जांच को भटकाने और प्रभावित करने के लिए ही जेल अधीक्षक के संरक्षण में यह खेल खेला गया है। जांच पूरी होने पर निश्चित ही इस संस्था के सभी पदाधिकारी जेल की सलाखों के पीछे होंगे।
​इस मामले में शिकायतकर्ता रिंकू रितेश चौरसिया ने एफ.आई.आर. की प्रति, RTI के दस्तावेज़, समाचार पत्रों की कतरनें और टीवी समाचारों की डीवीडी भी साक्ष्य के रूप में सभी संबंधित उच्च कार्यालयों को प्रेषित की है। इस बड़े खुलासे के बाद से प्रशासनिक और राजनैतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

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