छिंदवाड़ा पुलिस की बड़ी कामयाबी; आरोपी निकला उत्तराखंड का साबिर अली, ‘हरभजन सिंह’ बनकर दी थी चकमा
रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
भेष बदलने और पहचान छिपाने में माहिर एक बेहद शातिर ‘नटवरलाल’ को छिंदवाड़ा की कोतवाली पुलिस ने चंडीगढ़ से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी शराब ठेके के कलेक्शन के ₹5,46,050/- लेकर रफूचक्कर हो गया था। खुद को सरदार बताकर ‘हरभजन सिंह’ के नाम से नौकरी करने वाले इस शातिर ठग का असली नाम साबिर अली है। पुलिस ने आरोपी के पास से नगदी, महंगे मोबाइल और बैंक खाते में जमा रकम समेत करीब सवा दो लाख रुपये बरामद कर लिए हैं।
कलेक्शन के पैसे लेकर हुआ था फरार
मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि बीते 28 जून 2026 को प्रार्थी कवंजीत सिंह बेदी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी खमारपानी, बिछुआ, उमेगांव और बिसापुर स्थित शराब दुकानों के कलेक्शन के कुल ₹5,46,050/- लेकर उनका कर्मचारी ‘हरभजन सिंह’ (निवासी हिसार, हरियाणा) फरार हो गया था। यह रकम उसे लालबाग स्थित बेदी आर्केड ऑफिस में जमा करनी थी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने बीएनएस की धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज कर तलाश शुरू की।
चार राज्यों में खाक छानने के बाद चंडीगढ़ में धराया
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी छिंदवाड़ा के निर्देशन, सीएसपी अजय राणा और कोतवाली थाना प्रभारी आशीष कुमार धुर्वे के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी इनपुट के आधार पर आरोपी के संभावित ठिकानों हरियाणा (हिसार), उत्तराखंड (रुद्रपुर), पंजाब (लुधियाना) और चंडीगढ़ में ताबड़तोड़ दबिश दी। आखिरकार, चंडीगढ़ में घेराबंदी कर आरोपी को दबोच लिया गया।
पहचान के पीछे की चौंकाने वाली कहानी
गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी की तलाशी ली गई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। उसके पास से दो अलग-अलग नामों के दस्तावेज मिले। कड़ाई से पूछताछ में उसने उगला कि उसका असली नाम साबिर अली (44 वर्ष) है और वह उधमपुर नगर (उत्तराखंड) का रहने वाला है। बचपन में माता-पिता की मौत के बाद वह सरदारों के बीच रहा, जिससे वह बेहतरीन पंजाबी बोलना सीख गया। इसी का फायदा उठाकर उसने करीब 5-6 साल पहले हरियाणा से ‘हरभजन सिंह’ के नाम पर फर्जी पहचान पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया था और इसी नकली पहचान के दम पर छिंदवाड़ा में नौकरी हासिल की थी।
मौज-मस्ती में उड़ाए पैसे, पहले से दर्ज हैं ड्रग्स के केस
आरोपी ने कबूला कि चोरी की रकम से उसने महंगे मोबाइल खरीदे, आलीशान होटलों में रुका और ऐश-ओ-आराम में पैसे खर्च कर दिए। पुलिस ने उसके पास से दो मोबाइल, नकली दस्तावेज, नकली ड्राइविंग लाइसेंस, 17 हजार रुपये नगद और एक बैंक पासबुक जब्त की है, जिसके खाते में ₹2 लाख जमा हैं (जिन्हें फ्रीज करा दिया गया है)। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ पंजाब (बठिंडा) और हरियाणा (हिसार) में ड्रग्स तस्करी के दो मामले पहले से दर्ज हैं।
पुलिस टीम को मिलेगा नगद पुरस्कार
इस पेचीदा मामले का पर्दाफाश करने में कोतवाली थाना प्रभारी आशीष कुमार धुर्वे, सउनि ब्रिजेश सिंह रघुवंशी, आरक्षक विकास बैस, सागर डहेरिया और सायबर सेल के नितिन सिंह, आदित्य रघुवंशी व अभिषेक ठाकुर की मुख्य भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ने पूरी टीम की पीठ थपथपाते हुए नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
