पत्रकारों ने अपनी 14 सूत्रीय मांगो को लेकर प्रधानमंत्री के नाम सौपा ज्ञापन

Revanchal
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कान्हा नेशनल पार्क में अव्यवस्थाओं एवं लगातार हो रही बाघों की मौत का जिम्मेदार कौन….

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मण्डला। मध्यप्रदेश के विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में लगातार सामने आ रही अव्यवस्थाओं बाघों की मौत और कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर अब जिले के पत्रकारों ने मोर्चा खोल दिया है। पिछले कई दिनों से कलेक्ट्रेट मार्ग पर पत्रकार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रशासन से निष्पक्ष जांच तथा ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में पत्रकारों ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को 14 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है।

पत्रकारों का आरोप है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में लंबे समय से कई अनियमितताएं चल रही हैं जिनकी जानकारी समय-समय पर समाचार माध्यमों के जरिए प्रशासन और शासन तक पहुंचाई जाती रही है लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

पत्रकारों का कहना है कि लगातार हो रही बाघों की मौत और पार्क क्षेत्र में बढ़ती अव्यवस्था वन्यजीव संरक्षण की गंभीर स्थिति को दर्शाती है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में स्थित कान्हा नेशनल पार्क में फैली अव्यवस्थाओं को लेकर पत्रकार लगातार आवाज उठा रहे हैं।

नियमित रूप से समाचार प्रकाशित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा न तो निष्पक्ष जांच कराई गई और न ही दोषियों पर कार्रवाई हुई। इसी कारण जिलेभर के पत्रकार 5 मई 2026 से लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। ज्ञापन में पत्रकारों ने कहा कि कान्हा प्रबंधन द्वारा कई बार पत्रकारों को गलत जानकारी दी जाती है जिससे वास्तविक स्थिति छिपाई जाती है।

पत्रकारों ने मांग की है कि यदि किसी मामले में गलत जानकारी दी जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। इसके साथ ही पत्रकारों ने पार्क के भीतर बने पक्के निर्माणों पर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि कान्हा के भीतर होटल रिसॉर्ट और अन्य निर्माण कार्य पर्यावरणीय दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय हैं। पत्रकारों ने ऐसे निर्माणों को तत्काल हटाने की मांग की है। पत्रकारों ने कान्हा के तीनों प्रमुख प्रवेश द्वारों के आसपास हुए अतिक्रमण को भी गंभीर समस्या बताया।

उनका कहना है कि पार्क क्षेत्र के आसपास लगातार व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक वातावरण पर असर पड़ रहा है। ज्ञापन में मांग की गई कि पार्क क्षेत्र के समीप किए गए अतिक्रमणों को तत्काल हटाया जाए। इसके अलावा पत्रकारों ने कान्हा को मांसाहार मुक्त क्षेत्र घोषित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि राष्ट्रीय उद्यान के आसपास मांसाहार और अव्यवस्थित पर्यटन गतिविधियों से वन्यजीव संरक्षण की भावना प्रभावित हो रही है।

पत्रकारों ने पार्क क्षेत्र में स्थित रिसॉर्ट और पर्यटन स्थलों में होने वाले तेज ध्वनि प्रदूषण पर भी चिंता जताई। ज्ञापन में मांग की गई कि रिसॉट्र्स में डीजे, आतिशबाजी और शादी-विवाह जैसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाया जाए। पत्रकारों का कहना है कि तेज आवाज और रोशनी से वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और उनका व्यवहार असामान्य हो सकता है। ज्ञापन में पार्क के गाइड सिस्टम को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। पत्रकारों ने मांग की है कि गाइड व्यवस्था को पूरी तरह बदला जाए और इसमें पारदर्शिता लाई जाए।

उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में कई प्रकार की अनियमितताएं हैं जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों को परेशानी होती है। पत्रकारों ने पिछले पांच वर्षों में कान्हा प्रबंधन को मिले बजट और उसके उपयोग की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि यह बताया जाए कि वन्यजीवों की सुरक्षा तकनीकी उपकरणों की खरीद भोजन व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाओं पर कितनी राशि खर्च की गई।

इसके साथ ही पत्रकारों ने यह भी मांग की कि पिछले पांच वर्षों में प्रचार-प्रसार पर खर्च की गई राशि की जानकारी सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि यदि संरक्षण कार्यों पर गंभीरता से काम हुआ होता तो लगातार वन्यजीव मौतों की घटनाएं सामने नहीं आतीं। पत्रकारों ने कान्हा में पत्रकारों की पांच सदस्यीय मॉनिटरिंग टीम बनाने की मांग की है जो प्रत्येक माह पार्क क्षेत्र का निरीक्षण करे और वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक करे।

उनका कहना है कि स्वतंत्र मॉनिटरिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी और कई अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा। पार्क के भीतर बने पुल, पुलिया, सडक़ और पानी की व्यवस्था जैसे निर्माण कार्यों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। पत्रकारों ने पूछा है कि किन परियोजनाओं के तहत निर्माण हुए और उन पर कितनी राशि खर्च की गई। इसके अलावा पत्रकारों ने पार्क के भीतर संचालित सभी होटलों की सूची सार्वजनिक करने तथा उनकी वैधता की जांच कराने की भी मांग उठाई।

पार्क के भीतर मौजूद मवेशियों से वन्यजीवों में संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इसलिए पार्क क्षेत्र के अंदर मौजूद सभी मवेशियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए। उनका कहना है कि इससे वन्यजीवों को बीमारियों से बचाया जा सकेगा। पत्रकारों ने मांग की कि प्रतिदिन जंगल सफारी में जाने वाले वाहनों और पर्यटकों की जानकारी पार्क के तीनों गेटों पर सार्वजनिक की जाए।

इससे पर्यटकों को पारदर्शी जानकारी मिलेगी और सफारी संचालन में निष्पक्षता बनी रहेगी। ज्ञापन के अंतिम बिंदु में पत्रकारों ने कान्हा पार्क क्षेत्र में प्लास्टिक डिस्पोजल सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि प्लास्टिक कचरा वन्यजीवों और पर्यावरण दोनों के लिए घातक साबित हो रहा है। पत्रकारों के इस आंदोलन को जिले के कई सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों का समर्थन भी मिलने लगा है। प्रदर्शन में शामिल पत्रकारों का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पारदर्शिता के लिए किया जा रहा है। धरना स्थल पर मौजूद पत्रकारों ने कहा कि जब तक मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता और निष्पक्ष जांच शुरू नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ज्ञापन के दौरान जिले के सभी पत्रकार शामिल रहे।

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