डिजिटल इंडिया से कोसों दूर घटलिंगा क्षेत्र; पेड़ों पर कपड़े बांधकर ढूंढना पड़ता है सिग्नल, रात में जंगल जाने की मजबूरी
रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
एक तरफ जहां जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी तक ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘चौतरफा विकास’ के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ छिंदवाड़ा जिले के तामिया क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा आज भी संचार क्रांति के दौर में आदिम युग जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है। हम बात कर रहे हैं छिंदवाड़ा के ‘दूसरे पातालकोट’ कहे जाने वाले घटलिंगा और उसके आसपास के करीब एक दर्जन गांवों की, जहां विकास की किरण तो दूर, मोबाइल का नेटवर्क तक नहीं पहुंच पाया है।
15 हजार की आबादी… हाथों में मोबाइल, पर स्क्रीन पर ‘नो नेटवर्क’
श्रीजोत, चिचारा, लालडाना, खारचा, कवर ताल, सोपारिया, माचा दाना, घटलिंग, कोखराम, सालदाना और प्रतापगढ़ जैसे लगभग 12 गांवों की करीब 10 से 15 हजार की आबादी इस चरमराई व्यवस्था का दंश झेल रही है। ग्रामीणों के हाथों में चमचमाते स्मार्टफोन तो हैं, लेकिन वे सिर्फ एक ‘डब्बा’ बनकर रह गए हैं। बात करने के लिए ग्रामीणों को आज भी 5-5 किलोमीटर दूर पैदल चलना पड़ता है।
अनोखा जुगाड़ पेड़ों पर कपड़ा बांधकर तय किए हैं ‘टावर स्पॉट’
गांव की महिलाओं और बुजुर्गों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि नेटवर्क ढूंढने के लिए उन्हें पहाड़ियों की खाक छाननी पड़ती है। कमाल की बात तो यह है कि ग्रामीणों ने पहाड़ियों पर स्थित उन पेड़ों को कपड़ों से चिन्हित (बाँध) कर रखा है, जहां बमुश्किल थोड़ा-बहुत नेटवर्क मिल जाता है। दिन में तो जैसे-तैसे काम चल जाता है, लेकिन रात के समय यदि कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो घने जंगलों और पहाड़ों पर जाकर नेटवर्क तलाशना जान जोखिम में डालने जैसा है।
चंडी माई दर्शन के लिए आने वाले बाहरी श्रद्धालु भी परेशान
क्षेत्र में एक प्राचीन और प्रसिद्ध दार्शनिक स्थल ‘पुरानी चंडी माई मंदिर’ स्थित है। यहां नागपुर, भोपाल, बैतूल जैसे बड़े शहरों से हर हफ्ते सैकड़ों श्रद्धालु मन्नतें लेकर आते हैं। लेकिन यहां आते ही वे पूरी दुनिया से कट जाते हैं। भोपाल हाईवे रोड महज 10 किलोमीटर दूर है, पर इस 10 किलोमीटर के दायरे में नेटवर्क का नामोनिशान नहीं है।
दिखावे का बीएसएनएल टावर महीने में 20 दिन बंद
ग्रामीणों के लंबे संघर्ष के बाद ग्राम घाटलिंगा में बीएसएनएल का एक टावर खड़ा तो किया गया, लेकिन वह भी सफेद हाथी साबित हो रहा है। सांसद बंटी साहू के हस्तक्षेप के बाद यह चालू तो हुआ, लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि महीने में 20 दिन यह टावर बंद रहता है। लगातार बिजली कटौती के कारण टावर बंद पड़ा रहता है और यदि चालू भी हो, तो इसकी रेंज मात्र 1 किलोमीटर तक ही सीमित है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अंतिम गुहार
पूर्व के जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाने के बाद भी इस क्षेत्र को सिर्फ आश्वासन ही मिले। अब ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला प्रशासन, क्षेत्रीय विधायक और सांसद से रुंधे गले से मांग की है कि,ग्राम चिचारा या घटलिंगा में तत्काल जियो , एयरटेल या बीएसएनएल का नया और क्षमतावान टावर लगाया जाए।
यदि चिचारा में टावर लगता है, तो पातालकोट की गोद में बसे 4 किलोमीटर के दायरे के सभी गांवों को नेटवर्क मिलने लगेगा।
सवाल अब भी बरकरार है
जो सूबे के मुखिया और जिले के आला अधिकारी पातालकोट के विकास को लेकर चिंतित रहते हैं, वे इन 15 हजार ग्रामीणों को ऑनलाइन पढ़ाई, एम्बुलेंस सुविधा और ऑनलाइन बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं देने में और कितना वक्त लेंगे?
