“सरकारी गवाह को डराकर न्याय प्रक्रिया में बाधा!” CMHO जबलपुर डॉ. संजय मिश्रा के खिलाफ गवाही देने वाले राकेशिया पर IMA अध्यक्ष डॉ. ऋचा शर्मा द्वारा बनाया जा रहा है दबाव
दैनिक रेवांचल टाइम्स
न्याय के खिलाफ षड्यंत्र या भ्रष्टाचार का बचाव?
स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और अनैतिकता के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे जबलपुर के सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा अब न केवल कानून से भाग रहे हैं, बल्कि आरोपों की जांच में बने सरकारी गवाह और शिकायतकर्ता नरेंद्र राकेशिया को डरा-धमका कर न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
डॉ मिश्रा के खिलाफ पांच बड़े आरोप: शासन ने माना दोषी
- निजी लैबों में हिस्सेदारी का खुला उल्लंघन
– एप्पल पैथोलॉजी, फेथ पैथोलॉजी समेत 4 निजी संस्थानों में हिस्सेदारी का शासन ने किया स्पष्ट उल्लेख। - दूसरी शादी और संपत्ति खरीद में नियमों का उल्लंघन
– बिना अनुमति के दूसरी शादी व 50 लाख की संपत्ति का पंजीयन, शासन की जानकारी के बिना। - सेवा पुस्तिका में फर्जी पेज और जालसाजी
– खुद की सेवा पुस्तिका में 8 फर्जी पेज जोड़कर दस्तावेजों में कूटरचना। - कोषालय सॉफ्टवेयर में अवैध नामांकन परिवर्तन
– पत्नी का नाम खुद ही बदला, बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति। - पहली नियुक्ति ही नियमविरुद्ध
– 7 वर्ष बाद कार्यभार ग्रहण, नियुक्ति पर प्रश्नचिन्ह।

राकेशिया बने सरकारी गवाह, कोर्ट ने दिए जांच के आदेश
समाजवादी पार्टी के जबलपुर जिला महासचिव नरेंद्र राकेशिया ने डॉ. मिश्रा के खिलाफ विस्तृत शिकायत की थी, जिस पर शासन ने कार्यवाही करते हुए राकेशिया को सरकारी गवाह बनाया। माननीय उच्च न्यायालय ने लोकायुक्त को 45 दिन में जांच पूरी कर कार्यवाही करने का आदेश भी दिया।
IMA अध्यक्ष डॉ. ऋचा शर्मा के जरिये बनाया जा रहा दबाव?
राकेशिया द्वारा कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने के बाद, डॉ. मिश्रा और उनके सहयोगियों द्वारा उन्हें इस याचिका को वापस लेने के लिए धमकाया गया। 14 जुलाई को राकेशिया ने पुलिस अधीक्षक को सुरक्षा की मांग वाली शिकायत भी दर्ज कराई थी।
चार दिन बाद 18 जुलाई को डॉ. ऋचा शर्मा ने IMA की ओर से प्रेस वार्ता कर राकेशिया पर आरोप लगाए, जिसमें तथ्यों को तोड़-मरोड़कर मीडिया और पुलिस को गुमराह किया गया।
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पत्रकारों और जनता को गुमराह करने की साज़िश
IMA अध्यक्ष द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में:
आरोप पत्र का उल्लेख नहीं किया गया।
कोर्ट में लंबित अवमानना याचिका छिपाई गई।
अस्पतालों की फर्जी फायर NOC, अवैध लाइसेंस और अपूर्ण भवन प्रमाणपत्र जैसे मुद्दों को जानबूझकर दबा दिया गया।
इसके बजाय राकेशिया और समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव पर “गिरोह” चलाने का झूठा आरोप लगाया गयाl
“उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” की मिसाल
एक ओर डॉ. मिश्रा ने सगी बहन से शादी कर ताऊ को धोखा दिया, फिर छात्रा से विवाह कर पहली पत्नी और मानसिक रूप से कमजोर बेटी को छोड़ दिया। अब जब उनकी प्रशासनिक और आपराधिक हकीकत उजागर हो रही है, तो अपने प्रभावशाली नेटवर्क का उपयोग कर जांच रुकवाने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश उफान पर
समाजवादी पार्टी ने ऐलान किया है कि:
यदि डॉ. ऋचा शर्मा और उनकी टीम माफी नहीं मांगती,
तो उनके खिलाफ धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
