आरटीआई की धज्जियां उड़ा रहे जिम्मेदार, सूचना मांगने पर सचिव की मनमानी!

Revanchal
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अपीलीय अधिकारी के आदेश भी बेअसर, शिकायतों को कागजों में निपटाकर दबाया जा रहा मामला

सूचना छिपाने से भ्रष्टाचार पर उठ रहे सवाल, प्रशासनिक कार्यप्रणाली कटघरे में


दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला/नैनपुर। सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) आम नागरिकों को शासन-प्रशासन से जवाब मांगने का अधिकार देता है, लेकिन मंडला जिले में यही कानून जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता का शिकार होता दिखाई दे रहा है। नैनपुर तहसील की ग्राम पंचायत बोरी पीपरदाही में आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी वर्षों बाद भी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर किसके संरक्षण में सूचना देने से बचा जा रहा है और क्या छिपाने की कोशिश की जा रही है?


ग्राम बोरी पीपरदाही निवासी पंकज जंघेला ने आरोप लगाया है कि उन्होंने वर्ष 2023 से पंचायत के विकास कार्यों, वित्तीय लेन-देन और विभिन्न अभिलेखों की जानकारी प्राप्त करने के लिए आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किए थे। मामले में प्रथम अपीलीय अधिकारी ने जानकारी उपलब्ध कराने के स्पष्ट आदेश जारी किए, लेकिन संबंधित पंचायत सचिव ने आदेशों को भी ठेंगा दिखाते हुए आज तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।


जब आदेशों का सम्मान नहीं, तो कानून का क्या मतलब?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अपीलीय अधिकारी के आदेशों का ही पालन नहीं हो रहा है, तो फिर सूचना का अधिकार अधिनियम का अस्तित्व केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है। जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।


सीएम हेल्पलाइन और सीपीग्राम्स भी बने औपचारिकता का माध्यम?
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन और सीपीग्राम्स (CPGRAMS) पोर्टल पर भी दर्ज कराई थी। शिकायत उच्च स्तर तक पहुंची, लेकिन निष्पक्ष जांच कराने के बजाय कागजी कार्रवाई कर शिकायत का निराकरण दर्शा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जिस जानकारी को लेकर शिकायत की गई थी, वह आज भी उपलब्ध नहीं कराई गई, फिर शिकायत का समाधान किस आधार पर कर दिया गया?


सूचना छिपाने के पीछे क्या है राज?
लगातार जानकारी देने से बचने और आदेशों की अनदेखी से यह संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं पंचायत के कार्यों और वित्तीय रिकॉर्ड में ऐसी अनियमितताएं तो नहीं हैं जिन्हें सार्वजनिक होने से रोका जा रहा है। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो फिर जानकारी देने में इतनी हिचकिचाहट क्यों दिखाई जा रही है?


भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि सूचना देने में की जा रही देरी और आनाकानी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का काम कर रही है। आरटीआई के माध्यम से यदि विकास कार्यों और खर्चों की जानकारी सामने आए तो कई तथ्यों का खुलासा हो सकता है। यही कारण है कि अब पूरे मामले को लेकर प्रशासन की निष्पक्षता पर भी सवाल उठने लगे हैं।


जवाबदेही तय करे प्रशासन, दोषियों पर हो कार्रवाई
शिकायतकर्ता पंकज जंघेला ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अपीलीय अधिकारी के आदेशों का तत्काल पालन कराया जाए तथा सूचना का अधिकार अधिनियम की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि आदेशों के बाद भी जानकारी नहीं मिलती है तो यह केवल एक व्यक्ति के अधिकार का हनन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर सीधा प्रहार है।


पंकज जंघेला
ग्राम बोरी पीपरदाही, तहसील नैनपुर, जिला मंडला।

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