
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला/महाराजपुर से रिपोर्ट, नगरपालिका परिषद मंडला के अंतर्गत महाराजपुर क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राष्ट्रीय राज्यमार्ग 12-ए पर पहले डिवाइडर निर्माण और सौंदर्यीकरण के नाम पर शासकीय राशि लाखो खर्च की गई, लेकिन आज भी कई स्थानों पर डिवाइडर अधूरे पड़े हैं। इन अधूरे कार्यों के कारण पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और आगे भी खतरा बना हुआ है।
इसके बाद उसी स्थान पर पुनः सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपए खर्च करोड़ो खर्च किए गए, पर नतीजा सिफर रहा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। न तो सड़क पूरी तरह चौड़ी हुई और न ही सौंदर्यीकरण का कार्य पूरा दिखाई देता है।
सबसे गंभीर स्थिति फुटपाथों की है। जहां पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए फुटपाथ पर अब खुलेआम व्यापारिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं दुकान दारो के द्वारा फुटपाट तो फुटपाट सड़को तक अपना सामान फैला रहे है जिससे आने जाने वालों वाहनों पैदल चलने वालों लोगों को इन अबैध अतिक्रमण से समस्या से होकर गुजरना पड़ रहा और नगर पालिका प्रशासन चैन से सो रहा हैं।
वही दूसरी तरफ दुकानदार के द्वारा सड़को और फुटपाथों में कूलर, फ्रिज, अलमारी, कुर्सी-टेबल जैसी सामग्री रखकर दुकानों का विस्तार फुटपाथ तक कर दिया गया है। हालात ऐसे हैं कि पैदल चलने वालों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ गई है।
जहाँ से अतिक्रमण हटाया गया था वहाँ फिर से अतिक्रमण की जा चुके है और पहले से ज्यादा जगहो में दुकाने संचालित हो रही हैं अतिक्रमण हटाओ अभियान महज़ केवल दिखावा था जो अब बन कर दिया गया और दुकान दारो को मनमानियों के लिये खुल्ला छोड़ दिया गया हैं।
वही स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब से नगर पालिका प्रशासन में मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजनन नगफड़े ने कुर्सी संभली है तब से नगर और उप नगरीय क्षेत्र का बुरा हाल है जगह जगह कचरे के ढेर आसानी से देखने मिल जायेंगे सड़को फुटपाथों में अबैध कब्जा आसानी से मिल जायेगा सब्जी मार्केट में सब्जी दुकानदारो की अराजकता देखने को मिल जायेगी जहाँ पूरी सड़को में डिलिया और सब्जी व्यापारियों ने कब्जा जमा रखा है लोगो का निकलना मुश्किल होता है और मनमाने तरीके से अबैध सड़को के किनारे दुकानें सज रही हैं, ऐसा प्रतीत होता है मानो फुटपाथों पर लगाए गए पेवर ब्लॉक व्यापारियों की सुविधा के लिए ही बनाए गए हों।
जबकि हकीकत यह है कि फुटपाथ का निर्माण पैदल यात्रियों के सुरक्षित आवागमन के लिए किया जाता है।
कानूनी दृष्टि से भी यह स्थिति गंभीर है। फुटपाथ पर अतिक्रमण करना सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग और कानूनन अपराध है। यह न केवल आम जनता के मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है, बल्कि संबंधित नगर पालिका अधिनियमों के तहत दंडनीय भी है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है।
वहीं दूसरी ओर, आरोप यह भी है कि नगर पालिका का राजस्व अमला छोटे और गरीब लोगों पर सख्ती दिखाता है, जबकि बड़े पैमाने पर हो रहे इस तरह के अतिक्रमण को अनदेखा किया जा रहा है।
जनता के सवाल:
क्या फुटपाथ व्यापारियों के लिए बनाए गए हैं? अधूरे निर्माण कार्यों के लिए जिम्मेदार कौन है? दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब कार्रवाई करता है और आम जनता को सुरक्षित फुटपाथ कब मिल पाते हैं। या फ़िर नगरपालिका प्रशासन चैन से आराम फरमाते हुये दुकानदारो को अभयदान देंगे।
