सेवा की प्रतिमूर्ति स्व. सी.बी. सूर्यवंशी की प्रथम पुण्यतिथि ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनी

Revanchal
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​रक्तदान, फल वितरण और पौधारोपण कर समाज ने दी अपने संस्थापक अध्यक्ष को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

रेवांचल टाइम्स ​छिंदवाड़ा
जितेन्द्र अलबेला

सूर्यवंशी (कलार) समाज छिंदवाड़ा के संस्थापक एवं प्रथम अध्यक्ष, प्रखर समाजसेवी स्व. सी.बी. सूर्यवंशी की प्रथम पुण्यतिथि मंगलवार, 14 अप्रैल को समाज द्वारा ‘सेवा दिवस’ के रूप में श्रद्धा और सेवा भाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समाज के सदस्यों ने उनके बताए आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हुए विभिन्न सेवा कार्य संपन्न किए।

​श्रद्धांजलि सभा से हुई शुरुआत
​कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. सूर्यवंशी के निवास स्थान पर हुआ। उनके सुपुत्र अभिनव (हनी) सूर्यवंशी की गरिमामयी उपस्थिति में समाज के सक्रिय सदस्यों ने स्व. सूर्यवंशी के छायाचित्र पर पुष्पमाला अर्पित की। उपस्थित जनों ने 2 मिनट का मौन धारण कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके द्वारा समाज हित में किए गए कार्यों को याद किया।

​मानव सेवा का संकल्प रक्तदान और वस्त्र वितरण
​स्व. अध्यक्ष के सेवाभावी व्यक्तित्व को नमन करते हुए समाज के सक्रिय सदस्य केसरी नंदन सूर्यवंशी ने रक्तदान कर मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी कड़ी में विनोद सूर्यवंशी द्वारा जरूरतमंदों को वस्त्र वितरित कर उनकी सहायता की गई।
​बुजुर्गों का आशीर्वाद और पर्यावरण संरक्षण
​समाजसेवी देवीचंद सूर्यवंशी, सुरेश सूर्यवंशी, कुबेर सूर्यवंशी, देवेंद्र सूर्यवंशी, दिनेश सूर्यवंशी, जग्गनाथ सूर्यवंशी एवं कमलेश सूर्यवंशी ने वृद्धाश्रम पहुंचकर वृद्धजनों के बीच समय व्यतीत किया। उन्होंने बुजुर्गों को फल वितरित किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सम्मान प्रकट किया।

​पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अखिल सूर्यवंशी एवं मोहित सूर्यवंशी द्वारा पौधारोपण किया गया, जिससे इस पुण्य तिथि को प्रकृति की सेवा से भी जोड़ा गया।

​आदर्शों को आगे बढ़ाएगा समाज
​इस अवसर पर समाज के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सामूहिक संकल्प लिया कि स्व. सी.बी. सूर्यवंशी ने जिस सेवा भावना के साथ समाज की नींव रखी थी, उसे निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा। समाज के लोगों ने कहा कि उनकी पुण्यतिथि केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का प्रेरणा दिवस है।
​स्व. सी.बी. सूर्यवंशी का जीवन समाज के लिए समर्पित था। उनके पदचिह्नों पर चलते हुए सेवा कार्यों के माध्यम से उन्हें दी गई यह श्रद्धांजलि ही वास्तव में सच्ची श्रद्धांजलि है।

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