जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, 25 में से 17 विशेषज्ञ डॉक्टरों पर 10 लाख लोगों का बोझ

Revanchal
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जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से मरीजों का कष्ट

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में प्रदेशभर में 25 प्रथम श्रेणी नेत्र रोग विशेषज्ञों की पदस्थापना की गई, लेकिन पिछड़े जिले मंडला को एक भी विशेषज्ञ नहीं मिल सका।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ का पद वर्षों से खाली पड़ा है। फिलहाल जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल से डॉ. तरुण अहरवाल सप्ताह में मात्र दो दिन यहां आकर सेवाएं दे रहे हैं, जिससे हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में जानकारी के अनुसार कुल 42 विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 25 पद रिक्त हैं। मात्र 17 विशेषज्ञ डॉक्टरों के भरोसे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था लंगड़ाती हुई चल रही है। मेडिसिन, रेडियोलॉजी, ईएनटी, टीबी, त्वचा रोग और मनोरोग विशेषज्ञों के सभी पद खाली पड़े हैं। रेडियोलॉजी विशेषज्ञ न होने के कारण जिले में वर्षों से सोनोग्राफी मशीन धूल खा रही है और मरीजों की जांच नहीं हो पा रही। नाक-कान-गला (ईएनटी) विशेषज्ञ पिछले तीन साल से अनुपस्थित हैं। पीएचसी बकौरी में उपलब्ध ईएनटी डॉक्टर को जिला अस्पताल में नहीं लगाया गया।
गंभीर मरीजों का जबलपुर पर निर्भर होना
त्वचा रोग और मनोरोग विशेषज्ञों की अनुपलब्धता के कारण गंभीर मरीजों को जबलपुर रेफर किया जा रहा है।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मनोरोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को इलाज के साथ-साथ विकलांगता प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए भी जबलपुर जाना पड़ता है। शल्य चिकित्सा और अस्थि रोग विशेषज्ञों के 4-4 स्वीकृत पदों पर केवल 1-1 डॉक्टर कार्यरत हैं। नेत्र रोग के 2 पदों में से 1 डॉक्टर विगत दो वर्षों से अनाधिकृत अनुपस्थित चल रहे हैं।
शिशु रोग विशेषज्ञों के 7 स्वीकृत पदों में 5 भरे हुए हैं, जबकि पैथोलॉजी और एनेस्थीसिया में भी भारी कमी है। मौजूद डॉक्टरों पर मरीजों का दबाव कई गुना बढ़ गया है। एक-एक डॉक्टर को दिनभर में सैकड़ों मरीज देखने पड़ रहे हैं, जिससे उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
बंधपत्र डॉक्टर भी जॉइन नहीं कर रहे
1 अप्रैल को 15 बंधपत्र चिकित्सकों की नियुक्ति हुई थी, लेकिन जिला अस्पताल में अब तक एक भी डॉक्टर ने जॉइन नहीं किया। पिछले वर्ष भी 22 बंधपत्र चिकित्सकों की पोस्टिंग हुई थी, तब भी जॉइनिंग शून्य रही। मेडिकल ऑफिसरों के 23 स्वीकृत पदों में से 16 रिक्त हैं और मात्र 7 कार्यरत हैं। नियमित क्लास-1 चिकित्सकों की पदस्थापना न होने से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है।
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर सवाल
जिले के सांसद, मंत्री विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि विशेषज्ञ डॉक्टरों की पदस्थापना में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। जबकि अन्य जिलों के सिविल अस्पतालों में नेत्र विशेषज्ञ पहुंच गए, मंडला को नजरअंदाज कर दिया गया। स्थानीय स्तर पर प्रयासों की कमी से आबादी के अनुपात में स्वास्थ्य सुविधाएं नदारद हैं।
मंडला की फैक्ट फाइल
आबादी: लगभग 10 लाख
स्वीकृत विशेषज्ञ पद: 42
कार्यरत विशेषज्ञ: 17
रिक्त पद: 25
मेडिकल ऑफिसर स्वीकृत: 23, कार्यरत: 07
वही मंडला जैसे आदिवासी और पिछड़े जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की इस बदहाली से आमजन खासा नाराज है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्काल पदस्थापना सुनिश्चित करें, अन्यथा मरीजों की जान को खतरा बना रहेगा।

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